अल्मोड़ा। अल्मोड़ा में दुग्ध संघ की प्रबंधन समिति की मुश्किल कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। वित्तीय अनियमितता से घिरने के बाद निलंबित प्रबंधन समिति को दो तिहाई बहुमत नहीं मिला जिससे उस पर बर्खास्तगी की तलवार लटक गई है। समिति को बहाल करने के लिए बेहद जरूरी 76 सदस्यों का समर्थन चाहिए। उसके पक्ष में महज 57 सदस्य ही खड़े हैं। ऐसे में निदेशालय स्तर पर जल्द समिति को बर्खास्त करने का निर्णय लिया जा सकता है।
दुग्ध संघ की प्रबंधन समिति के लिए संकट बढ़ता जा रहा है। प्रबंधन समिति को 128 सदस्यों में से 76 यानि दो तिहाई सदस्यों का समर्थन चाहिए था जो उसे नहीं मिला। बीते सोमवार को दुग्ध संघ में हुए मतदान में प्रबंधन समिति के पक्ष में 113 में से 57 मत मिले। 56 सदस्यों ने उसे बर्खास्त करने के पक्ष में मतदान किया। मतदान का आंकड़ा लगभग बराबरी पर रहने से प्रशासक सीडीओ अंशुल सिंह इस पर कोई निर्णय नहीं ले सके। अब उनकी मौजूदगी में हुए इस मतदान की विस्तृत रिपोर्ट जल्द निदेशालय भेजी जाएगी।
इसी वर्ष नवंबर में पूरा होना है कार्यकाल
अल्मोड़ा। दुग्ध संघ की प्रबंधन समिति का कार्यकाल इसी वर्ष नवंबर में पूरा होना है। अगर समिति बर्खास्त होती है तो अगले सात महीनों तक दुग्ध संघ प्रशासक ही चलाएंगे। चुनाव के बाद नई प्रबंधन समिति का गठन होगा।
ये है मामला
अल्मोड़ा। बीते फरवरी में दुग्ध संघ की प्रबंधन समिति पर वित्तीय अनियमितताओं का मामला सामने आया था। इसके बाद दुग्ध संघ के निदेशक संजय खेतवाल ने जांच करवाई जिसमें वित्तीय अनियमितता उजागर हुई। निदेशक ने 15 सदस्यीय प्रबंधन कमेटी को निलंबित कर दिया। प्रशासक के रूप में सीडीओ को जिम्मेदारी सौंपी गई। इसी बीच प्रबंधन समिति इस मामले को लेकर न्यायालय में पहुंची। न्यायालय के आदेश के बाद बीते सोमवार पातालदेवी स्थित दुग्ध संघ में प्रशासक सीडीओ अंशुल सिंह की अध्यक्षता में प्रबंधन समिति के सदस्यों की बैठक हुई। इसमें सदस्यों का पक्ष जानने के लिए मतदान कराया गया।
कोट-
अल्मोड़ा में दुग्ध संघ की प्रबंधन समिति के निलंबित होने के बाद चर्चा के लिए एजीएम की बैठक बुलाई गई थी। रिपोर्ट मेरे पास नहीं पहुंची है। रिपोर्ट आने के बाद इसका आंकलन कर समिति के भंग करने या इसकी पुन: बहाली पर निर्णय लिया जाएगा।
संजय कुमार खेतवाल, निदेशक, दुग्ध विकास विभाग, हल्द्वानी।
कोट-
प्रबंधन समिति की बहाली के लिए दो तिहाई सदस्यों का बहुमत चाहिए था। इसके बाद ही निर्णय हो सकता था। न्यायालय और निदेशक को रिपोर्ट भेज दी है। निदेशक इस पर अंतिम निर्णय लेंगे।
अंशुल सिंह, प्रशासक, दुग्ध संघ, अल्मोड़ा।