गांधी कुटीर को जोड़ने वाली सड़क के हाल। संवाद
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ताड़ीखेत (अल्मोड़ा)। एक तरफ देश आजादी की 75वीं वर्षगांठ मनाने में मशगूल है लेकिन जिन लोगों के कारण आजादी मिली उन्हीं नायकों की धरोहरों को संजोना तंत्र भूल गया है। 1929 में ताड़ीखेत स्थित गांधी कुटिया में राष्ट्रपिता महात्मा गांधी ने पहुंचकर रणबांकुरों में जोश भरा था। गांधी जी के लिए यहां कुटिया का निर्माण किया गया लेकिन इस कुटिया को जोड़ने वाला मोटर मार्ग वर्षों से बदहाली का दंश झेल रहा है।
ताड़ीखेत बाजार से बनी यह सड़क ब्लाक मुख्यालय सहित कई विद्यालयों को भी जोड़ती है। गांधी कुटिया देखने के लिए सालभर यहां पर्यटक पहुंचते हैं, लेकिन मार्ग की बदहाली के कारण वह अक्सर कड़वे अनुभव ही लेकर लौटते हैं।
ताड़ीखेत बाजार से ब्लाक मुख्यालय और गांधी कुटीर होते हुए पथुली मोटर मार्ग वर्षों पूर्व कट चुका है, लेकिन 11 किमी मोटर मार्ग आज भी डामरीकरण से वंचित है। ब्लॉक मुख्यालय से प्रेम विद्यालय जीआईसी और जीजीआईसी तक मोटर मार्ग कीचड़ से पटा पड़ा है। कई बार इस मार्ग पर स्कूल आते जाते बच्चे रपटकर चोटिल तक हो जाते हैं।
एसएमसी अध्यक्ष राकेश पांडे और पीटीए अध्यक्ष नंद किशोर ने बताया कि इस सड़क की बदहाली सुधारने की मांग कई बार सांसद और विधायकों से की जा चुकी है, लेकिन आज तक सार्थक कार्यवाही नहीं हो सकी है।
-यह सड़क पीएमजीएसवाई के अंतर्गत है। ऊंणी से डामरीकरण का कार्य शुरू हो गया है। शीघ्र ही छूटे हिस्से में भी डामर हो जाएगा। इसके लिए काफी प्रयास किए गए हैं। शीघ्र ही सड़क की दशा सुधरेगी।-डॉ. प्रमोद नैनवाल, विधायक रानीखेत।