अल्मोड़ा। जिले में बारिश के साथ ही बंद सड़कों के चलते लोग परेशान हैं। बारिश के बाद मलबा और बोल्डर गिरने से चार सड़कों पर आवाजाही थमी है, जिससे 15 से अधिक गांवों का शेष दुनिया से सड़क संपर्क कटा है और सात हजार से अधिक की आबादी परेशान है।
जिले में बारिश के बाद पीपना मनहैत-डंगूला, सौधार-पनुवाद्योखन, ध्याडी-मिरगांव मानेश्वर, बल्मरा-तल्ली चनोली सड़कें बंद हैं। इन सड़कों पर जगह-जगह भारी मात्रा में मलबा और बोल्डर गिरे हैं, जिससे वाहनों की आवाजाही ठप है। यहां तक कि इन सड़कों में पैदल सफर करना भी जोखिम भरा है। ऐसे में लोग कई तरह की दुश्वारियां झेल रहे हैं।
इन गांवों में बीते दो दिनों से रसोई गैस, सब्जी और अन्य सामग्री के वाहन नहीं पहुंच पा रहे हैं। स्थानीय दुकानों में फल-सब्जी की किल्लत हो गई है, इससे लोग परेशान हैं। किसी तरह ग्रामीण मलबे और बोल्डरों के बीच जान जोखिम में डालकर स्थानीय प्रमुख बाजारों में पहुंच रहे हैं। तब जाकर दैनिक जरूरत के सामान का प्रबंध हो रहा है।
जल्द सड़क नहीं खुलीं तो लोगों की परेशान अधिक बढ़ेगी। आपदा प्रबंधन अधिकारी विनीत पाल ने कहा कि सड़कों को खोलने के लिए जेसीबी लगाई गई हैं। जल्द सड़कों पर आवाजाही सुचारू करने के प्रयास हो रहे हैं। संवाद
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अल्मोड़ा में दो मिलीमीटर तो चौखुटिया में हुई 20 मिमी बारिश
अल्मोड़ा। शुक्रवार को जिला मुख्यालय सहित अन्य हिस्सों में झमाझम बारिश हुई, इससे जनजीवन अस्त-व्यस्त रहा। अल्मोड़ा में बीते 24 घंटे में दो जबकि चौखुटिया में सबसे अधिक 20 एमएम बारिश रिकार्ड की गई। सुबह के समय बारिश होने से विद्यार्थियों को स्कूल पहुंचने में खासी दिक्कत झेलनी पड़ी। उन्हें छाता के सहारे रास्तों पर बह रहे नालों के बीच आवाजाही करने के लिए मजबूर होना पड़ा।
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बारिश का आंकड़ा (एमएम में)
अल्मोड़ा-2
द्वाराहाट -1
चौखुटिया -20
सोमेश्वर -9
भिकियासैंण - 0.5
जागेश्वर -3.5
सल्ट- 10.5
जेती-9
मासी - 0.5
शीतलाखेत- 5.5
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मानसूनी बारिश का कहर, पानी-पानी हो गए लोगों के घर
बागेश्वर। जिले में मानसूनी बारिश लोगों के लिए आफत बनकर बरस रही है। बारिश का असर नगरपालिका क्षेत्र के मंडलसेरा में अधिक देखने को मिला। लोगों के घर तालाब बन गए तो रास्ते और खेत तालाब बने नजर आए। सड़कों पर गधेरा बहने लगा तो गलियां नाली बन गईँ।
शुक्रवार को तड़के जिले में तेज बारिश हुई। करीब पांच बजे तक चली बारिश ने जिला मुख्यालय से लेकर कपकोट तक के लोगों की परेशानी बढ़ा दी। जिला मुख्यालय के मंडलसेरा में कुंथी गधेरे का पानी सड़कों पर बहते हुए लोगों के घरों तक पहुंच गया। खेत और खेल के मैदान तालाब बन गए। संकरी गलियां पानी भरने से नाली में बदल गई।
करीब एक घंटे में हुई भारी बारिश का असर नगर के ठाकुरद्वारा क्षेत्र में भी दिखा। खेतों से बहता हुआ पानी लोगों के घरों में घुस गया। वहीं, कपकोट और गरुड़ में हुई बारिश से सरयू और गोमती नदी का जलस्तर भी बढ़ गया।
जीतरनगर का रास्ता टूटा, विद्यार्थी हुए परेशान
बगोश्वर। बृहस्पतिवार को अलर्ट के चलते विद्यालयों में अवकाश रहा, लेकिन बारिश नहीं हुई। शुक्रवार को छुट्टी नहीं होने से विद्यार्थियों को भारी बारिश में स्कूल जाना पड़ा। इस दौरान मंडलसेरा से जीतनगर को जाने वाले रास्ता गधेरा आने से टूट गया। क्षतिग्रस्त रास्ते और उफनते गधेरे के बीच से जोखिम उठाकर विद्यार्थी स्कूल को गए।
मंडलसेरा बाईपास से विवेकानंद विद्यालय को जाने वाले रास्ते में भी पानी बहने और मलबा आने से विद्यार्थियों को दिक्कत हुई। नगर में भी भारी बारिश से हुए जलभराव में पैदल चलने वाले लोगों और बच्चों को परेशानी उठानी पड़ी।
बागेश्वर में बारिश मिमी में
बागेश्वर 77
कपकोट 70
गरुड़ 33
नदियों का जलस्तर
सरयू नदी 867 मीटर
गोमती नदी 865.90 मीटर
झटक्वाली-ग्वाड़ सड़क से आवासीय घरों को खतरा
बागेश्वर। झटक्वाली-ग्वाड़ मोटर मार्ग से हो रहे भूस्खलन से आवासी घरों को खतरा हो गया है। ग्रामीणों ने डीएम को ज्ञापन देकर प्रभावित परिवारों को अन्यत्र विस्थापित करने की मांग की है।
शुक्रवार को डीएम को दिए ज्ञापन में ग्रामीणों ने बताया कि मोटर मार्ग कटिंग के बाद विभाग ने मकानों के पास दीवार बनाई थी जो भूस्खलन के चलते टूट गई है। आवासीय घरों के पास तक भूस्खलन हो रहा है जिसके चलते गुलाब सिंह पुत्र भवान सिंह, चंदन सिंह पुत्र गुलाब सिहं, हरीश सिंह पुत्र गुलाब सिंह, पूरन सिंह, केदार सिंह पुत्र प्रताप सिंह और प्रकाश सिंह पुत्र प्रताप सिंह के मकान खतरे की जद में आ गए हैं। बताया कि वर्ष 2018 से हर साल भूस्खलन हो रहा है। अब घर के आंगन तक भूस्खलन की जद में आ चुके हैं। प्रभावितों ने जल्द स्थलीय निरीक्षण कर प्रभावितों को सुरक्षा प्रदान करने की मांग की। संवाद
घरों में घुसा बारिश का पानी, सड़क पर लोगों का हंगामा
बागेश्वर। मंडलसेरा और जीतनगर में बारिश का पानी एक नई कहानी कह गया। लोगों के घरों में बारिश का पानी भर गया। इससे गुस्साए लोगों ने मंडलसेरा-आरे बाईपास पर जमकर हंगामा किया और शासन-प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी की। करीब छह घंटे तक हाईवोल्टेज ड्रामा चलता रहा। तहसील प्रशासन, पुलिस, नगरपालिका, लोनिवि के अधिकारी मौके पर तो पहुंचे, लेकिन हालात और लोगों के गुस्से के आगे बेबस नजर आए।
मंडलसेरा के बीचोंबीच से बहने वाले बरसाती कुंथी गधेरे का पानी पूर्व में खेतों से होकर नदी में चला जाता था, लेकिन जिला गठन के बाद सेरे में बनने वाले मकानों से गधेरे का मार्ग बाधित हो गया। रही-सही कसर आरे-मंडलसेरा बाईपास ने पूरी कर दी। अब बारिश के दौरान गधेरे में पानी आता है, लेकिन निकासी का प्रबंध नहीं होने से पानी लोगों के घरों की ओर चला जाता है।
शुक्रवार सुबह हुई तेज बारिश के दौरान भी कुछ ऐसा ही मंजर दिखा। गधेरा उफान पर आया तो सड़क, मकान, खेत जो भी सामने पड़ा, गधेरे का पानी वहां घुसता रहा। कुछ देर बाद लोनिवि की जेसीबी सड़क से मलबा हटाने आई तो उसे भी आबादी की ओर धकेल दिया। पानी और मलबा एक साथ घरों की ओर बहते देख क्षेत्र के लोगों का गुस्सा फूट गया। लोग सड़क पर आकर नारेबाजी करने लगे। खासतौर पर महिलाएं बेहद गुस्से में दिखीं।
आक्रोशित लोगों को समझाने के लिए लोनिवि के अधिकारी आए, लेकिन चुपचाप चलते बने। पालिका के ईओ हयात सिंह परिहार ने भी काफी प्रयास किया। सूचना पर कोतवाल खष्टी बिष्ट और तहसीलदार दीपिका आर्या भी बारी-बारी मौके पर जाकर लोगों को समझाते दिखे। सुबह करीब नौ बजे से शुरू हुआ हंगामा आखिरकार दो बजे बाद शांत हो सका।
क्यों गुस्से में थीं महिलाएं
बागेश्वर। प्रदर्शन कर रहीं महिलाओं का कहना था कि वह कई वर्षों से यहां मकान बनाकर रह रही हैं। पूर्व में गधेरे का पानी नुकसान नहीं करता था। जब से सड़क बनी है हालात अधिक खराब हो गए हैं। बारिश के पानी के साथ मलबा भी घर में घुस रहा है। घर का सामान पानी से खराब हो गया है। उनका कहना था कि गधेरे से पानी की निकासी का उचित प्रबंध किया जाना चाहिए।
प्रदर्शनकारियों में भी होने लगी नोकझोंक
बागेश्वर। प्रदर्शन के दौरान एक समय ऐसा भी आया जब मंडलसेरा और जीतनगर के लोग आपस में ही उलझने लगे। कुछ लोगों का कहना था कि जहां पर गधेरा है, वहीं से पानी की निकासी का प्रबंध होना चाहिए। जबकि दूसरे पक्ष का कहना था कि गधेरा के लिए कोई निकासी का मार्ग पहले भी नहीं था। ऐसे में पानी की निकासी के लिए उचित व्यवस्था बनाई जानी चाहिए। संवाद
ऐसे हुआ मामले का पटाक्षेप
बागेश्वर। हंगामे के दौरान प्रदर्शनकारियों के दो गुट होने से मामले का हल नहीं निकल रहा था। आखिरकार तहसीलदार, कोतवाल और ईओ ने चर्चा के बाद कुछ पानी की निकासी गधेरे से और कुछ पानी की निकासी के लिए सड़क किनारे जेसीबी से नाली खोदने का प्रस्ताव दिया। जिस पर दोनों पक्ष सहमत हुए और आधे दिन तक चले हंगामे का पटाक्षेप हुआ।
बारिश से दो मकान टूटे, 11 सड़कों पर यातायात ठप
बागेश्वर। भारी बारिश से दो मकान आंशिक क्षतिग्रस्त हो गए हैं। वहीं जिले की 11 सड़कों पर यातायात ठप है। पूरे दिन सड़कों को खोलने का काम चलता रहा, लेकिन शाम तक केवल चार ही सड़कें खोली जा सकी।
शुक्रवार सुबह तक हुई बारिश के दौरान कपकोट तहसील के गैरखेत निवासी पूरन सिंह पुत्र नैन सिंह के एक मंजिल आवासीय मकान के कमरे और गोशाला की दीवार ढह गई। पगना निवासी सुंदर लाल पुत्र रूप राम का मकान भी आंशिक रूप से क्षतिग्रस्त हो गया।
वहीं भारी बारिश से सातचौंरा-जल्थाकोट, बागेश्वर-गिरेछीना, कांडा-सानिउडियार-रावतसेरा, सलानी-गनीगांव, भानी-हरसिंग्याबगड़, कपकोट-पिंडारी, बालीघाट-दोफाड़-धरमघर, भयूं-गुलेर, लीती बाजार-लीती गांव, कलना बैंड-पंत क्वैराली, कठपुडि़याछीना-सेराघाट, अमस्यारी-बूंगा, काफलीकमेड़ा, सिमगढ़ी और बड़ेत मोटर मार्गों पर भूस्खलन, मलबा गिरने और बोल्डर आने से यातायात बाधित हो गया था। शाम तक बागेश्वर-गिरेछीना, कांडा-रावतसेरा, बालीघाट-धरमघर, सलानी-गनीगांव मोटर मार्ग पर यातायात चालू हो सका।
सड़क टूटने से स्कूल नहीं जा पाए बच्चे
बागेश्वर। बागेश्वर-गिरेछीना सड़क पर भूस्खलन होने से सेंट जोसेफ स्कूल थुनाई के बच्चे स्कूल नहीं जा सके। वहीं सड़क बंद होने के चलते विद्यालय की ओर से अभिभावकों को मैसेज भेजकर स्कूल में अवकाश किए जाने की जानकारी दी।