रानीखेत (अल्मोड़ा)। ताड़ीखेत में बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं मुहैया कराने का दावा पांच साल में भी पूरा नहीं हो सका है। यहां सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) का भवन तो बनाया गया लेकिन हाल यह है कि यह अस्पताल अब भी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (पीएचसी) के रूप में संचालित हो रहा है। पीएचसी का उच्चीकरण न होने से स्वास्थ्य सुविधाओं का विस्तार नहीं हो सका है। इस कारण विकासखंड की 50 हजार से अधिक की आबादी बेहतर उपचार के लिए दूसरे अस्पतालों की दौड़ लगाने के लिए मजबूर हैं।
ताड़ीखेत पीएचसी से सोनी, देवलीखेत, चमरखान, बिल्ल्लेख, दौडाखाल सहित 60 से अधिक गांव जुड़े हैं। यहां के ग्रामीणों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं मुहैया कराने के मकसद से वर्ष 2018 में पीएचसी के स्थान पर सीएचसी बनाने की घोषणा की गई और इसके लिए भवन बना दिया गया लेकिन भवन बनने के बाद भी पीएचसी का उच्चीकरण सीएचसी के रूप में नहीं हो सका।
इस वजह से यहां विशेषज्ञ चिकित्सकों की तैनाती के साथ ही अन्य सुविधाओं का विस्तार नहीं हो पाया है और मरीजों को गंभीर रोग के उपचार के लिए हायर सेंटर की दौड़ लगानी पड़ रही है। लंबे समय से क्षेत्र के लोग इसे सीएचसी के रूप में संचालित करने की मांग कर रहे हैं। मगर शासन- प्रशासन में उनकी अब तक कोई सुनवाई नहीं हुई।
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एक्सरे जांच की सुविधा नहीं
रानीखेत। ताड़ीखेत में सीएचसी का संचालन न होने से मरीज मूलभूत स्वास्थ्य सुविधाओं के लिए तरस रहे हैं। यहां एक्सरे जांच की सुविधा तक नहीं है। ऐसे में हड्डी रोग, कमर दर्द सहित अन्य रोगों से पीड़ित मरीजों को मजबूरन अन्य अस्पतालों का रुख करना पड़ रहा है।
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सीएचसी बनता मिलती ये सुविधाएं
रानीखेत। प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र ताड़ीखेत को सीएचसी के रूप में संचालित होता तो यहां बाल रोग, अस्थि रोग, दंत रोग के विशेषज्ञ चिकित्सकों की तैनाती होती। केंद्र पर एक्सरे, अल्ट्रासाउंड सहित कई सुविधाओं का भी विस्तार होता और लोगों को अन्य अस्पतालों के चक्कर नहीं काटने पड़ते।
सीएमओ डॉ. आरसी पंत का कहना है कि मानक पूरा न होने से पीएचसी ताड़ीखेत का सीएचसी के रूप में संचालन नहीं हो सका है। भविष्य में इसे सीएचसी के रूप में संचालित किया जाएगा।