जैंती (अल्मोड़ा)। भारत माता को गुलामी की जंजीरों से मुक्त कराने के लिए शहादत देने वाले सालम के शहीद नर सिंह धानक और टीका सिंह कन्याल की आखिरकार सरकार को याद आ ही गई। आजादी के 75 साल बाद शहीद स्थल धामद्यो में दोनों शहीदों की प्रतिमाएं लग तो गईं हैं लेकिन अब अनावरण का इंतजार है।
अंग्रेजों भारत छोड़ो आंदोलन के दौरान ब्रिटिश फौज सालम भी पहुंच गई थी। उसने सालम वासियों पर जुल्म कर कई मकानों, डाकखाने को जला दिया। इसके विरोध में 25 अगस्त 1942 को सालम के कई गांवों से क्रांतिकारी जैंती पहुंचे। वहां आंदोलनकारियों और ब्रिटिश सेना के बीच झड़प हुई। इस दौरान ब्रिटिश फौज ने क्रांतिकारियों पर गोलीबारी कर दी। इससे जैंती तहसील के चौकुना निवासी नर सिंह धानक और कांडे निवासी टीका सिंह कन्याल शहीद हो गए।
शहीदों की याद में जैंती तहसील के धामद्यो में शहीद दिवस समारोह मनाया जाता है। पिछले वर्ष शहीद दिवस समारोह में पहुंचे मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने शहीद नर सिंह धानक और टीका सिंह कन्याल की प्रतिमाएं लगाने की घोषणा की थी। घोषणा के अनुरूप शहीद स्थल पर बाइस लाख रुपये की लागत से दोनों शहीदों की आदमकद प्रतिमाएं लगा दी गईं हैं। अब लोगों को शहीदों की प्रतिमाओं के अनावरण का इंतजार है। संवाद
धामद्यो में बना टिनशेड बदहाल, पेयजल की भी व्यवस्था नहीं
जैंती। शहीद स्थल धामद्यो में लोगों के बैठने के लिए टिनशेड बनाया गया है लेकिन इसमें फर्श नहीं है। इससे वहां बैठने में लोगों को परेशानी झेलनी पड़ती है। बारिश में पानी घुसने से गंदगी घुसने से बैठने लायक स्थिति नहीं होती। शहीद स्थल पर पेयजल की कोई व्यवस्था नहीं है। शहीद समारोह समिति के अध्यक्ष दीवान सिंह बोरा ने कहा कि टिनशेड के नीचे शीघ्र फर्श डाला जाना चाहिए। शहीद स्थल पर लोगों को बेहतर सुविधा देने के लिए पेयजल की व्यवस्था की जानी चाहिए। संवाद