अल्मोड़ा। गायत्री परिवार की ओर से पशुबलि के खिलाफ चलाए जा रहे जागरूकता अभियान से प्रभावित होकर 80 वर्षीय एक बुजुर्ग महिला ने 40 साल पूर्व मांगी मन्नत पूरी होने पर मंदिर में पशु बलि देने का निर्णय बदल दिया। उन्होंने अपनी तरफ से इस परंपरा को बंद कर मंदिर में सात्विक पूजा की जिसकी हर तरफ चर्चा हो रही है।
जिले के मटीला शीतलाखेत निवासी रघुली देवी पत्नी स्व. चनर सिंह ने 40 साल पहले घर में खुशहाली आने पर मां स्याही देवी मंदिर में पशुबलि देने का संकल्प लिया था जिसे उन्होंने बदल दिया। कुछ समय पूर्व गायत्री परिवार ने उनके गांव पहुंचकर लोगों को पशुबलि प्रथा रोकने के लिए जागरूक किया था। इसका असर यह रहा कि रघुली देवी ने गायत्री परिवार के अभियान से प्रभावित होकर अपना पशुबलि का संकल्प त्यागकर बीते शनिवार को मां स्याही को नारियल, फूल, धूप दीप अर्पित कर सात्विक पूजा की। पुरोहित जीवन कांडपाल ने पूजा संपन्न कराई। पुत्र कुबेर सिंह बिष्ट और हरीश बिष्ट ने भी मां को सात्विक पूजा के लिए प्रेरित किया। वहां चंपा बिष्ट, विनीता बिष्ट, मोहनी देवी, संस्कृति बिष्ट आदि थे।
न्यायालय भी न्याय का मंदिर है। लोगों को न्यायालय के आदेशों का पालन करना चाहिए। मैंने पशुबलि का संकल्प लिया था जिसे त्याग कर मंदिर में सात्विक पूजा की। - रघुली देवी।
चैत्र नवरात्रि, आश्विन नवरात्रि में गायत्री परिवार के सदस्य प्रसिद्ध चितई गोलू देवता मंदिर में पशु बलि के खिलाफ जनजागरण अभियान चलाते हैं। गांव में यज्ञ और संस्कार कराने के दौरान लोगों को पशु बलि के खिलाफ जागरूक किया जाता है। अभियान से लोग सात्विक पूजा को प्रेरित हो रहे हैं। - भीम सिंह अधिकारी, सदस्य गायत्री परिवार, अल्मोड़ा।