अल्मोड़ा। अल्मोड़ा में मित्र पुलिस की बैरकों के हाल बेहाल हैं। टूटा फर्श, टपकती छत और क्षतिग्रस्त दीवारें इन बैरकों की पहचान बन चुकी हैं। पुलिस जवान जान जोखिम में डालकर इन बैरकों में रहने को मजबूर हैं।
अल्मोड़ा में कोतवाली के नीचे बनी पुलिस बैरक का निर्माण राज्य गठन से पूर्व हुआ था। वर्तमान में यह बैरक बदहाली की मार झेल रही हैं। इनकी दीवारें क्षतिग्रस्त हैं तो छत में लगे टिन सड़ गए हैं। फर्श जगह-जगह क्षतिग्रस्त हो चुका है।
बैरकों का नये सिरे से निर्माण न होने से पुलिस जवान जान जोखिम में डालकर यहां रह रहे हैं हैं। बैरकों के नजदीक बने नए पुलिस आवास के हाल भी बुरे हैं। सीलन से इनकी दीवारें जवाब देने लगी हैं।
कई बैरकों को किया गया है खाली
अल्मोड़ा। सालों पहले टिन और बल्लियों के सहारे बैरकों की छत का निर्माण किया गया था। छत में लगे टिन और बल्लियां पूरी तरह से सड़ चुकी हैं। जवानों की सुरक्षा को देखते हुए इनमें से कई बैरकों को खाली करना पड़ा था। संवाद
टपकती छत को पन्नियों से ढकना मजबूरी
अल्मोड़ा। कोतवाली के ठीक नीचे बैरक व पुलिस आवास स्थित हैं। इन आवासों में पुलिस जवान अपने परिवार के साथ रहते हैं। लेकिन बारिश में जवानों व उनके परिजनों की दिक्कत बढ़ जाती है। जर्जर छत से पानी कमरों में घुसता है। ऐसे में छत पर प्लास्टिक की पन्नी डालना एकमात्र विकल्प है।
कोट- समय-समय पर पुराने भवनों का नवनिर्माण किया जाता है। पुरानी बैरकों के नवनिर्माण के लिए प्रस्ताव भेजा गया है। कई नए भवनों का निर्माण किया गया है।
प्रदीप कुमार राय, एसएसपी, अल्मोड़ा।