अल्मोड़ा। जिले में रेशम उत्पादन से लोगों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए इस बरसात में बांज, बुरांश के साथ शहतूत का भी पौधरोपण होगा। रेशम विभाग हवालबाग, ताकुला, लमगड़ा विकासखंड में 138 नए किसानों को रेशम उत्पादन से जोड़कर यहां शहतूत के 40,000 से अधिक पौधे रोपेगा।
पर्वतीय क्षेत्रों में बंदरों और जंगली सुअरों के आतंक से नुकसान झेल रहे किसानों के लिए रेशम उत्पादन आत्मनिर्भरता का जरिया बनेगा। इसकी कवायद शुरू हुई है। जिले के हवालबाग, बिरोड़ा, डुंगरी, भेटाबढ़ीया, ताकुला, कांडे, लमगड़ा, जोशीधूरा क्षेत्र में इस मानसून काल रेशम विभाग रेशम उत्पादन के लिए 40,000 से अधिक शहतूत के पौधे रोपेगा। इसके बाद क्षेत्र के 138 लोगों को रेशम कीट उपलब्ध कराए जाएंगे और वह रेशम का उत्पादन कर आत्मनिर्भरता की तरफ अपने कदम बढ़ाएंगे। हर व्यक्ति के हिस्से में 300 पौधे आएंगे जिनमें वह रेशम कीट पालन करेगा।
कम समय में बेहतर कमाई का है जरिया
अल्मोड़ा। पहले चरण में जिले के 260 लोगों ने 2,250 किलो कोकून बेच दस लाख रुपये से अधिक की कमाई की। हर किसान ने करीब 30,000 रुपये की आमदनी की। अब दूसरे चरण में अन्य किसानों को भी इससे जोड़ा जा रहा है।
किसान रेशम उत्पादन से बेहतर कमाई कर रहे हैं। इसे बढ़ावा देने के लिए मानसून काल में शहतूत के पौधों का रोपण किया जाएगा। - राजेश कोठारी, वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी, रेशम विभाग, अल्मोड़ा।