अल्मोड़ा। जिले में बारिश के बीच बंद सड़कें लोगों का दर्द बढ़ा रही हैं। बारिश के बाद यहां तीन सड़कें बंद होने से 12 गांव अलग-थलग पड़े हैं और इनका शेष दुनिया से सड़क संपर्क पूरी तरह कटा है। ऐसे में चार हजार से अधिक की आबादी को खासी दिक्कत झेलनी पड़ रही है।
बारिश के बाद मलबा और बोल्डर गिरने से चमकना-अधे, बल्मरा-तल्ली चिनौली, शशिखाल-खुमाड़ सड़कों पर आवाजाही ठप है। इन सड़कों पर जगह-जगह मलबा गिरने से वाहनों के पहिए थमे हैं और 12 से अधिक गांवों का सड़क संपर्क पूरी तरह कटा है। ऐसे में इन गांवों तक सब्जी, रसोई गैस सहित अन्य जरूरी सामान नहीं पहुंच पा रहा है, जिससे इनकी किल्लत होने लगी है।
ग्रामीण किसी तरह जान जोखिम में डालकर पैदल चलकर स्थानीय बाजारों में पहुंचकर जरूरी सामान की व्यवस्था करने के लिए मजबूर हैं। हालांकि आपदा प्रबंधन विभाग जल्द सड़कों को खोलने के दावे कर रहा है। जिला आपदा प्रबंधन अधिकारी विनीत पाल ने कहा कि मलबा और बोल्डर हटाने के काम में जेसीबी जुटी हैं। जल्द सड़कों पर आवाजाही शुरू होगी। संवाद
-
अल्मोड़ा में बारिश से जनजीवन अस्त-व्यस्त
अल्मोड़ा। जिले में शनिवार दोपहर बाद झमाझम बारिश हुई, जिससे जनजीवन अस्त-व्यस्त रहा। बारिश के बाद लोगों ने घरों को दौड़ लगाई और बाजारों में भी सन्नाटा पसरा रहा। लोगों को बारिश से बचने के लिए छाता का सहारा लेना पड़ा। हालांकि दो घंटे बाद बारिश थमने से लोगों ने राहत महसूस की। संवाद
-
बारिश का आंकड़ा (एमएम में)
द्वाराहाट -8.5
रानीखेत -5.4
चौखुटिया -14
सोमेश्वर -10.4
भिकियासैंण - 45.5
जागेश्वर -6.0
ताकुला -1.0
मासी - 25.0
-
पहले पुत्र और पति का साथ छूटा अब मकान भी ढह गया
बागेश्वर। किशोर पुत्र की मौत और उसके गम में पति का निधन होने के बाद जैसे-तैसे बेटी के साथ पुराने मकान में जीवन गुजार ही थी, लेकिन यहां भी विपदा ने पीछा नहीं छोड़ा। बारिश भी मेरे लिए विपत्ति लेकर आई और मेरा पुराना घर भी तोड़ दिया साहब। अब तक हिम्मत बांधी थी, अब टूटने लगी हूं। यह शब्द हैं पुरकोट गांव की मंजू देवी पत्नी स्व. आनंद बल्लभ के। जिनका मकान शुक्रवार को बारिश में ढह गया था।
शनिवार को आपदा पीड़ित मंजू देवी को राहत सामग्री वितरण करने के लिए रेडक्रॉस की टीम गांव पहुंची तो उनकी व्यथा सुनकर सबकी आंखें भर आईं। उन्होंने बताया कि सात साल पहले इकलौते पुत्र का निधन हो गया था। उस समय वह हाईस्कूल में पढ़ता था। बेटे के निधन ने पति को तोड़कर रख दिया। बेटे की मौत से लगा सदमा उनके लिए जानलेवा साबित हुआ। करीब चार साल पहले पति भी साथ छोड़ गए। 12 वर्षीय बेटी के साथ जिस घर में रहकर दिन गुजार रही थी, वह आपदा की भेंट चढ़ गया है। अब मां-बेटी मकान के बचे हुए हिस्से में जान जोखिम में डालकर रहने को मजबूर हैं।
रेडक्रॉस के जिला सचिव आलोक पांडेय, डॉ. हरीश दफौटी, दीपक खेतवाल और गणेश पांडेय ने महिला को तिरपाल, कंबल, बर्तन और जरूरी सामग्री प्रदान की। खेतवाल ने उन्हें राशन के लिए आर्थिक मदद भी प्रदान की। रेडक्राॅस टीम ने महिला को आगे भी हरसंभव मदद करने का भरोसा दिलाया।
इस बारिश ने दो सड़कों को चलने लायक नहीं छोड़ा
बागेश्वर। इस बरसात ने सीमांत के गांव को जोड़ने वाली दो सड़कों में सुनसानी ला दी है। दोनों मोटर मार्ग इस कदर दरके हैं कि एक मोटर मार्ग का अलाइमेंट बदलने के निर्देश जिला प्रशासन दे चुका है, तो दूसरी निर्माणाधीन रोड पर कार्यदायी संस्था आपदा से हुई क्षति के पुनर्निर्माण तक यातायात पर प्रतिबंध लगाने की गुहार लगा रही है।
इनमें से पहली सड़क सूपी-झूनी (निर्माणाधीन) पिछले 30 जून से बंद पड़ी है। काफी बड़े हिस्से में सड़क क्षतिग्रस्त हुई है। दूसरी सड़क काफलीकमेड़ा बीते चार जुलाई से बंद है। इन सड़कों का स्याह पक्ष देखें तो दोनों सड़कों के निर्माण में विभागीय खामी स्पष्ट रूप से सामने आई है।
झूनी सड़क पर बरसात से पहले तक वाहन संचालन होता था। बरसात में सड़क क्षतिग्रस्त हुई, तो निर्माणाधीन सड़क का हवाला देते हुए आरटीओ के निरीक्षण के बाद ही सड़क पर यातायात संचालित कराने के लिए वाप्कोस के स्थानिक अभियंता विशन लाल ने बीते 10 जुलाई को डीएम को पत्र लिखा है। सड़क पर वाहन चलाने पर स्वयं जिम्मेदार रहने तक की बात कही जा रही है।
उल्लेखनीय है कि कार्यदायी संस्था को निर्माणाधीन सड़क होने का एहसास बरसात से पहले नहीं हुआ? जब सड़क पर वाहन चलते थे।
वाप्कोस के काम पूर्व से ही विवादों में रहे हैं। हाल में समीक्षा बैठक के दौरान वाप्कोस के काम पर अंगुली उठाते हुए सांसद अजय टम्टा ने भविष्य में वाप्कोस को निर्माण कार्य न देने की संस्तुति प्रदेश सरकार को करने के निर्देश डीएम को दिए थे।
काफलीकमेड़ा सड़क के अलाइमेंट पर शुरुआत से विवाद रहा है। सड़क का मलबा आवासीय मकानों को नुकसान पहुंचा चुका है। दोनों सड़कें बुरी तरह से क्षतिग्रस्त हैं। दोनों सड़कों की बदहाली के लिए कार्यदायी संस्थाएं निश्चित रूप से जिम्मेदार हैं। जिम्मेदारी तय की जानी चाहिए।
डीएम अनुराधा पाल का कहना है कि काफलीकमेड़ा सड़क काफी क्षतिग्रस्त हो गई है। गांव के लोगों ने सड़क का अलाइमेंट बदलने की मांग की थी। पीएमजीएसवाई डिवीजन के ईई को अलाइमेंट बदलने के निर्देश दे दिए गए हैं। सूपी-झूनी सड़क पर पुनर्निर्माण होने तक यातायात पर रोक लगाने संबंधी पत्र उन्हें नहीं मिला है।
बागेश्वर की 10 सड़कों पर यातायात बाधित
बागेश्वर। जिले की 10 सड़कों पर शनिवार को यातायात बाधित रहा। इनमें से दो सड़क लंबे समय से बंद हैं। सड़क बंद होने से 10 हजार की आबादी प्रभावित है। इसके चलते लोगों को पहला वाहन छोड़कर दूसरे वाहन से गंतव्य के लिए जाना पड़ा। संवाद
आपदा प्रबंधन विभाग के अनुसार शनिवार को सातचौंरा-जल्थाकोट, कपकोट-पिंडारी ग्लेशियर, भानी-हसरसिंग्याबगड़, कुचौली-नलसूना, बागेश्वर-दफौट-नौगांव, बांसपटान-रावतसेरा, बड़ेत सड़क मबला, बोल्डर गिरने से बंद रही। 30 जून से बंद सूपी-झूनी और 4 जुलाई से बंद काफलीकमेड़ा सड़क पर शनिवार को भी यातायात सुचारु नहीं हुआ।
रानीखेत में कार पर गिरा पेड़, क्षतिग्रस्त
रानीखेत। चिलियानौला नगरपालिका के पास रानीखेत मुख्य सड़क पर विशालकाय पेड़ कार के ऊपर गिर गया। संयोग से कार सड़क किनारे खड़ी थी, जिसके कोई सवार नहीं था। नहीं तो बड़ी घटना हो सकती थी। पेड़ की चपेट में आने से आवाजाही करने वाले वाहन भी बाल-बाल बचे। इस दौरान सड़क पर आवाजाही ठप हो गई और सड़क के दोनों तरफ वाहनों की लंबी कतार लगी रही। सूचना के बाद मौके पर पहुंची वन विभाग की टीम ने पेड़ को हटाकर आवाजाही शुरू कराई। तब जाकर यात्री और वाहन चालक गंतव्य को रवाना हो सके।