जिले में बेहतर उपचार उपलब्ध कराने के दावे कर करोड़ों रुपये खर्च कर मेडिकल कॉलेज खोला गया है। यहां बेस अस्पताल भी संचालित हो रहा है। पर यहां मरीजों के दिल का दर्द सुनने वाला कोई नहीं है। स्वास्थ्य विभाग के मुताबिक, बीते 21 माह में 192 मरीज हार्ट अटैक से जूझते हुए अस्पताल पहुंचे। कार्डियोलॉजिस्ट न होने से इनमें से गंभीर 96 मरीजों को हायर सेंटर रेफर किया गया। परिजन उन्हें हल्द्वानी लेकर रवाना हुए, लेकिन समय पर अस्पताल न पहुंचने पर 22 मरीजों ने रास्ते में ही दम तोड़ दिया।
जिले की छह लाख की आबादी को बेहतर उपचार देने के लिए मेडिकल कॉलेज, बेस अस्पताल, जिला अस्पताल, महिला अस्पताल, रानीखेत उप जिला चिकित्सालय के साथ ही 9 सीएचसी संचालित हो रहे हैं। किसी भी अस्पताल में कॉडियोलॉजिस्ट तैनात नहीं है, इसकी मार दिल के मरीजों को सहनी पड़ रही है।
फिजिशियन करते हैं दिल के रोगियों का इलाज
कॉडियोलॉजिस्ट न होने से मरीज बेहाल हैं तो स्वास्थ्य विभाग लाचार है। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के कार्डियोलॉजिस्ट न होने से फिजिशियन के भरोसे दिल के मरीजों का उपचार किया जा रहा है। महज ईसीजी के जरिए ही उनकी स्थिति का पता लगाया जा रहा है। इकोकार्डियोग्राफी और एंजियोग्राफी की सुविधा नहीं होने से गंभीर मरीजों को जांच और उपचार के लिए हायर सेंटर रेफर करना मजबूरी है।
मेडिकल कॉलेज में कार्डियोलॉजिस्ट का पद सृजित नहीं
अल्मोड़ा के साथ ही पिथौरागढ़, बागेश्वर के मरीज अल्मोड़ा मेडिकल कॉलेज पर निर्भर हैं। हैरानी की बात यह है कि करोड़ों रुपये से खोले गए इस मेडिकल कॉलेज में कॉडियोलॉजिस्ट का पद ही सृजित नहीं है। ऐसे में समझा जा सकता है कि जिले के सबसे बड़े अस्पताल में किस कदर दिल के मरीजों का उपचार हो रहा होगा।
सीएमओ डॉ. आरसी पंत ने बतया कि जिले में फिलहाल कॉर्डियोलॉजिस्ट नहीं है। फिजिशियन दिल के मरीजों का उपचार कर रहे हैं। मरीजों को बेहतर उपचार देकर उनकी जान बचाई जा सके, इसके लिए गंभीरता से काम किया जाता है।
बागेश्वर का भी यही हाल
बागेश्वर जिले में हृदय रोग के इलाज की कोई व्यवस्था नहीं है। दिल के रोगियों को हल्द्वानी ले जाने के अलावा कोई चारा नहीं है। जिले के सामुदायिक स्वाथ्य केंद्र, प्राथमिक अस्पताल तो छोड़िये, जिला अस्पताल में तक हृदयरोग विशेषज्ञ नहीं है। दिल के मरीजों के इलाज की व्यवस्था न होने से लोग परेशान रहते हैं। कई बार हार्ट अटैक पड़ने पर रोगी की जान पर बन आती है।
हाल के वर्षों में हृदयाघात से कई लोगों की मृत्यु भी जिले में हो चुकी है। हालांकि इसका आंकड़ा स्वास्थ्य विभाग के पास नहीं है। सीएमओ डां. डीपी जोशी कहते हैं कि जिला अस्पताल में हृदयरोग विशेषज्ञ की तैनाती के लिए स्वास्थ्य महानिदेशालय से लगातार पत्राचार किया जा रहा है।