अल्मोड़ा। गुरुड़ाबांज महाविद्यालय में 17 साल बाद भी बीएससी, एमएससी, एमकॉम पाठ्यक्रमों को स्वीकृति नहीं मिल सकी है। विद्यार्थियों को इन पाठ्यक्रमों का ज्ञान लेने के लिए 50 किमी दूर जिला मुख्यालय की दौड़ लगानी पड़ रही है। इसके चलते जरूरतमंद विद्यार्थियों को पढ़ाई छोड़नी पड़ रही है।
वर्ष 2006 में गरुड़ाबांज में महाविद्यालय की स्थापना हुई। यहां वर्तमान में स्नातक स्तर पर 250 विद्यार्थी अध्ययनरत हैं। महाविद्यालय खुलने के बाद क्षेत्र के युवाओं को हर विषय का ज्ञान स्थानीय स्तर पर मिलने की उम्मीद थी जो पूरी नहीं हो सकी है। महाविद्यालय में बीएससी, एमएससी, एमकॉम पाठ्यक्रम स्वीकृत नहीं है। लंबे समय से विद्यार्थी इसकी मांग कर रहे हैं लेकिन मांग पूरी नहीं हो पा रही है। ऐसे में क्षेत्र के विद्यार्थियों को बीएससी, एमएससी और एमकॉम की पढ़ाई के लिए 50 किमी दूर जिला मुख्यालय की दौड़ लगानी पड़ रही है। जिला मुख्यालय में संचालित एसएसजे परिसर में भी सीट फुल होने से कई विद्यार्थियों को प्रवेश नहीं मिल पा रहा है और उन्हें घर बैठना पड़ रहा है। संवाद
किराए पर कमरा लेना हर विद्यार्थी के लिए नहीं संभव
अल्मोड़ा। गुरुड़ाबांज क्षेत्र के विद्यार्थियों को बीएससी, एमएससी और एमकॉम की पढ़ाई के लिए अल्मोड़ा या हल्द्वानी जाना मजबूरी है। यहां उन्हें किराए पर कमरा लेकर रहना मजबूरी है लेकिन हर विद्यार्थी के लिए ऐसा कर पाना संभव नहीं है। ऐसे में उनके लिए आगे की पढ़ाई जारी रखना किसी चुनौती से कम नहीं है।
एमएससी, एमकॉम पाठ्यक्रम शुरू करने के लिए उच्च शिक्षा निदेशालय को प्रस्ताव भेजा गया है। स्वीकृत शासन स्तर से ही मिलती है।
डॉ. रामअवतार सिंह, प्राचार्य, गुरुड़ाबांज महाविद्यालय।