अल्मोड़ा। खैरना-कर्णप्रयाग पैदल रास्ते पर आजादी से पहले बने ऐतिहासिक दृष्टि से महत्वपूर्ण दो पुल जर्जर हैं, जिन पर 40 गांव के लोग जान जोखिम में डालकर आवाजाही करने के लिए मजबूर हैं। 125 साल पहले बने इन्हीं पुलों से विद्यार्थी विद्यालयों में पहुंचते हैं जिससे खतरा बढ़ गया है और अभिभावक चिंतित हैं।
सड़कों का जाल बिछने से पहले खैरना से कर्णप्रयाग को जोड़ने वाला पैदल रास्ता आवाजाही का प्रमुख मार्ग होता था। इस रास्ते पर अब भी सोमेश्वर क्षेत्र के कुगौड़ा, कोटली, मनेला, बग्वालीपोखर, मजखाली, महतगांव, रतगढ़, कुवाली, दुगड़ाकोट सहित 40 गांवों के लोग आवाजाही करते हैं। लेकिन इस रास्ते पर दुगड़ाकोट के पास मल्या नदी में आजादी से पूर्व बने दो पुल आवाजाही के लिए खतरा बने हैं। रखरखाव के अभाव में दोनों पुल जर्जर होकर नदी में झूलने लगे हैं। इनके किनारे लगे गार्डर भी टूट गए हैं। ऐसे में कभी भी बड़ी दुर्घटना हो सकती है। लेकिन इन पर अब तक किसी की नजर नहीं पड़ी है और लोग जान जोखिम में डालकर आवाजाही करने को मजबूर हैं।
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खतरे के बीच विद्यालय पहुंच रहे हैं विद्यार्थी
अल्मोड़ा। इन गांवों के विद्यार्थियों के लिए विभिन्न विद्यालयों में पहुंचने के लिए यह एकमात्र रास्ता है। लेकिन नदी में लटकते पुलों के बीच आवाजाही करने में खतरा कम नहीं है। इन हालात में 150 से अधिक विद्यार्थी खतरे के बीच विद्यालय और घर आवाजाही कर रहे हैं, जिससे अभिभावक भी चिंतित हैं। वहीं बारिश में नदी के उफान पर आने से खतरा अधिक बढ़ गया है। वहीं इनके रखरखाव की जिम्मेदारी संभालने वाले जिला पंचायत के अधिकारी बजट का रोना रोकर अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ रहे हैं।
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शिकायत पर भी ध्यान नहीं दे रहे अधिकारी
दोनों पुल नदी में झूल रहे हैं। कई बार पुलों के नवनिर्माण की मांग की गई। लेकिन कोई सुनवाई नहीं हो रही है। बुजुर्ग और विद्यार्थी खतरे के बीच आवाजाही करने के लिए मजबूर हैं। - गोपाल सिंह नेगी, पूर्व बीडीसी सदस्य, दुगड़ाकोट।
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दोनों झूलते पुलों के गिरने का खतरा बना हुआ है। इन पुलों से होकर क्षेत्र के विद्यार्थी विद्यालयों में पहुंचते हैं। ऐसे में खतरा बना हुआ है। - दौलत सिंह मेहता, दुगड़ाकोट।
पुलों का निरीक्षण किया गया है। निश्चित तौर पर इनके नवनिर्माण की जरूरत है। लेकिन बजट की कमी आड़े आ रही है। इनके नवनिर्माण का प्रस्ताव भेजा जाएगा। - जगदीश प्रसाद, अपर मुख्य अधिकारी, जिला पंचायत, अल्मोड़ा।