वर्ष 2015 में ऐतिहासिक गोल्फ मैदान से सटे 1200 हेक्टेयर में फैले दलमोठी वन रेंज में मिनी अभयारण्य बनाने की हुई थी घोषणा
चेतन जोशी
रानीखेत (अल्मोड़ा)। पर्यटन नगरी में घोषणा के आठ साल बाद भी मिनी अभयारण्य को धरातल पर उतारने की योजना परवान नहीं चढ़ सकी है। ऐतिहासिक गोल्फ मैदान से सटे करीब 1200 हेक्टेयर में फैले दलमोठी वन रेंज में वर्ष 2015 में मिनी अभयारण्य बनाने की घोषणा हुई थी।
वन विभाग ने वर्ष 2015 में इसके लिए प्रस्ताव शासन को भेजा था। 2016 में इसे कैबिनेट की हरी झंडी भी मिल गई थी। तब इस मिनी अभयारण्य के जरिये पर्यटन गतिविधियों को बढ़ावा देने, खत्म होती जैवविविधता को संरक्षित करने, बर्ड वॉचिंग गतिविधियां शुरू करने के दावे किए गए थे, जो पूरे नहीं हुए। संवाद
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अक्तूबर 2014 में यहां मिनी अभयारण्य बनाने के लिए मास्टर प्लान तैयार किया गया था। शासन से प्रस्ताव पास होने के बावजूद आज तक इसकी कवायद शुरू नहीं हो सकी है। - दीप उपाध्याय।
जैव विविधता से परिपूर्ण दलमोठी वन क्षेत्र को कॉर्बेट नेशनल पार्क की तरह विकसित किया जाना चाहिए। इससे रानीखेत में पर्यटन को नई दिशा मिल सकती है। - भगवंत नेगी।
मिनी अभयारण्य के लिए 25 लाख की टोकन मनी भी आई थी लेकिन 2017 में इसे लौटा दिया गया। इसके बाद इस दिशा में प्रयास आगे नहीं बढ़ पाया। पर्यटन की दृष्टि से यह कार्य जरूरी है। - हिमांशु उपाध्याय।
रानीखेत में पर्यटकों को आकर्षित करने के लिए इस वन क्षेत्र को विकसित करना जरूरी है। सरकार को इस तरफ ध्यान देना चाहिए ताकि यहां पर्यटकों की संख्या में इजाफा हो सके। - अरविन्द अधिकारी।
यह मामला मेरे संज्ञान में नहीं है। जानकारी ली जाएगी। वर्तमान में दलमोठी वन क्षेत्र को मिनी अभयारण्य के रूप में विकसित करने की योजना नहीं है। - दीपक सिंह, डीएफओ, अल्मोड़ा।