भतरौंजखान (अल्मोड़ा)। भले ही हर घर नल से जल पहुंचाने के दावे हो रहे हैं लेकिन भतरौंजखान में 24 गांवों में ग्रामीण पानी के लिए प्राकृतिक जल स्रोतों और हैंडपंप की दौड़ लगा रहे हैं। एक माह से पर्याप्त पानी की आपूर्ति नहीं हो रही है। पेयजल योजना के पंप बदलने को लेकर जल निगम और संस्थान आमने-सामने हैं।
भतरौंजखान क्षेत्र के च्यूनी, खीला, भतरौंज, नौघर, रौलखेत, चमकोट सहित 24 गांवों को पेयजल आपूर्ति करने के लिए कोसी पंपिंग योजना को धरातल पर उतारा गया है। पंप में खराबी के चलते बीते एक माह से योजना से पेयजल आपूर्ति ठप है। इससे पांच हजार से अधिक की आबादी पानी के लिए परेशान हो रही है। नल सूखे हैं और इनसे पानी न टपकने से ग्रामीणों को प्राकृतिक जल स्रोतों और हैंडपंप की दौड़ लगाकर अपनी प्यास बुझानी पड़ रही है। ठंड में ग्रामीणों का पूरा दिन पानी भरने में बीत रहा है जिससे उन्हें समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। लंबे समय से ग्रामीण पंप बदलकर पेयजल आपूर्ति सुचारू करने की मांग कर रहे हैं लेकिन समस्या का समाधान नहीं किया गया है।
एक दूसरे पर जिम्मेदारी थोप रहे दोनों संस्थान
भतरौंजखान। कोसी पंपिंग योजना के पंप पुराने हो चुके हैं जिन्हें बदलना जरूरी है। जल निगम और जल संस्थान दोनों जिम्मेदार संस्थानों को मालूम है कि बगैर पंप बदले पर्याप्त पानी की आपूर्ति संभव नहीं है। इसके बावजूद दोनों संस्थान एक-दूसरे पर जिम्मेदारी थोपकर ग्रामीणों की समस्या को अनदेखा कर रहे हैं।
पंप में खराबी के कारण पेयजल आपूर्ति बाधित हो रही है। जल्द पंप को ठीक कर पेयजल आपूर्ति सुचारु की जाएगी।
देवेंद्र आर्य, कनिष्ठ अभियंता, जल निगम, रामनगर।
पंप बदलने की जिम्मेदारी जल निगम की है। पुराने पंप बदले जाने हैं। इसके बाद ही पेयजल आपूर्ति सुचारु हो सकेगी।
राजीव कुमार, कनिष्ठ अभियंता, जल संस्थान, नैनीताल।