अल्मोड़ा। टाटीक में हादसे में घायल विद्यार्थियों को समय पर एंबुलेंस न मिलने और एक को धक्का देकर रवाना करने के मामले में शुक्रवार को लोगों का गुस्सा फूटा था। यह हाल तब है जब बेस अस्पताल के पास दान की एक एंबुलेंस है लेकिन रजिस्ट्रेशन न होने से वह शोपीस खड़ी है। स्वास्थ्य विभाग से दान में मिली एंबुलेंस का चिकित्सा शिक्षा विभाग रजिस्ट्रेशन तक नहीं करा सका है। मरीजों को हायर सेंटर ले जाने के लिए परिजन निजी एंबुलेंस का सहारा लेने के लिए मजबूर हैं।
420 करोड़ खर्च कर खोले गए मेडिकल कॉलेज में संचालन के दो साल बाद भी एंबुलेंस की व्यवस्था नहीं हो सकी है। स्वास्थ्य विभाग ने मरीजों की दिक्कत को देखते हुए उन्हें हायर सेंटर भेजने के लिए मेडिकल कॉलेज और इसके अधीन संचालित बेस अस्पताल को दो एंबुलेंस दान में दी थीं। एक एंबुलेंस पुरानी हो गई है। वह आए दिन जवाब दे जाती है। दूसरी एंबुलेंस का चिकित्सा शिक्षा विभाग रजिस्ट्रेशन तक नहीं करा सका। मामला तब खुला जब कार दुर्घटना के घायल विद्यार्थियों का हाल जानने विधायक मनोज तिवारी मेडिकल कॉलेज पहुंचे। उन्होंने भी चिकित्सा विभाग की कार्यशैली पर सवाल खड़े किए।
चालक और ईधन की व्यवस्था करेगा स्वास्थ्य विभाग
अल्मोड़ा। मेडिकल कॉलेज में खड़ी दो एंबुलेंस के लिए चिकित्सा शिक्षा विभाग न तो चालक की व्यवस्था कर पा रहा है और ना ही ईधन की। ऐसे में यहां दम तोड़ रही स्वास्थ्य व्यवस्थाओं को पटरी पर लाने की जिम्मेदारी स्वास्थ्य विभाग को संभालनी पड़ी है। यहां खड़ी दो एंबुलेंस को संचालित करने के लिए स्वास्थ्य विभाग अब चालक और ईधन की व्यवस्था कर मरीजों को राहत पहुंचाएगा।
कोट
- हैरानी की बात यह है कि स्वास्थ्य विभाग से दान में मिली एंबुलेंस का चिकित्सा शिक्षा विभाग रजिस्ट्रेशन तक नहीं कर सका है। मैं मेडिकल कॉलेज के लिए आधुनिक एंबुलेंस की व्यवस्था करूंगा। जनता को राहत देना मेरा दायित्व है। सरकार पर भरोसा नहीं कर सकते।
-मनोज तिवारी, विधायक, अल्मोड़ा।
मेडिकल कॉलेज को दी गई एंबुलेंस के लिए चालक और ईधन की व्यवस्था स्वास्थ्य विभाग करेगा। मरीजों को राहत पहुंचाने के लिए यह निर्णय लिया गया है।
-डॉ. आरसी पंत, सीएमओ, अल्मोड़ा।
मेडिकल कॉलेज में एंबुलेंस की व्यवस्था के प्रयास किए जा रहे हैं। मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं मिले, यह प्रयास है।
-प्रो. सीपी भैंसोड़ा, प्राचार्य, मेडिकल कॉलेज, अल्मोड़ा।