अल्मोड़ा। पर्वतीय क्षेत्रों की सड़कों पर अब पुरानी बस ही दौड़ाई जाएंगी। नई बस की खरीद न कर पाने पर परिवहन निगम ने मानकों के नियमों में बदलाव कर दिया है और उम्र पूरी कर चुकीं पुरानी बस दौड़ाने की योजना बनाई है। कुमाऊं के बड़े पर्वतीय जिले अल्मोड़ा और पिथौरागढ़ में इस साल के अंत तक 63 पुरानी बस का संचालन करने की तैयारी चल रही है।
पहाड़ की सड़कों पर दुर्घटनाओं को रोकने और यात्रियों का सफर सुरक्षित बनाने के उद्देश्य से नई बस के सात वर्ष या पहाड़ी सड़कों पर सात लाख किमी का सफर पूरा करने के बाद मैदानी इलाकों में संचालित किया जाता था। अब पहले से ही घाटे में चल रहे परिवहन निगम के लिए नई बस की खरीद संभव नहीं हो पा रही है इसलिए निगम ने नियम में बदलाव कर पुरानी बसों को ही पहाड़ी सड़कों पर दौड़ाने की योजना बनाई है। अब खरीद के 15 साल तक बस का संचालन पहाड़ की सड़कों पर किया जा सकता है। निगम का दावा है कि अपनी उम्र पार करने के बाद भी बस में पहाड़ का सफर सुरक्षित होगा। इस दायरे में अल्मोड़ा में 20 और पिथौरागढ़ में 43 पुरानी बस शामिल हैं। अन्य पर्वतीय जिलों में भी हालात कुछ ऐसे ही हैं। संवाद
कई बार धोखा दे चुकी हैं पुरानी बस
अल्मोड़ा। परिवहन निगम के आकड़ों के अनुसार अल्मोड़ा में बीते एक साल में दो बस का ब्रेक तो एक का स्टीयरिंग फेल हो गया था। वहीं अल्मोड़ा-पिथौरागढ़ हाईवे पर पिथौरागढ़ डिपो की एक बस का स्टीयरिंग जाम होने से पैरापिट से टकरा गई थी। ये सभी बस अपनी उम्र के अंतिम पड़ाव में हैं। इनका संचालन लगातार जारी रहेगा।
मैदानी क्षेत्रों में चलाई जाती हैं पुरानी बस
अल्मोड़ा। पहाड़ी क्षेत्र में संचालित होने वाली अधिकतर बस की खरीद वर्ष 2015 से 2019 के बीच हुई है। पूर्व के नियमों के अनुसार सात साल उम्र पार करने के बाद इनमें से कई बस का संचालन मैदानी क्षेत्रों में हो रहा है।
परिवहन निगम ने पहाड़ी सड़कों पर बस के संचालन को लेकर नियमों में बदलाव किया है। अब खरीद के 15 साल तक पहाड़ की सड़कों पर बस का संचालन होगा और सात साल या सात लाख किमी का सफर पूरा करने वाली बस भी यहां संचालित होंगीं। बस की फिटनेस का पूरा ध्यान रखा जाता है।
- आरके आर्या, एआरएम, अल्मोड़ा डिपो।