अल्मोड़ा। जिले में मिलावटी खाद्य सामग्री की बिक्री को रोककर लोगों की सुरक्षा के दावे तो किए जा रहे हैं लेकिन खाद्य सामग्री की गुणवत्ता परखने को लिए गए सैंपल की जांच रिपोर्ट लैब से बाहर नहीं आ पा रही है। बीते दो वर्षों में लिए गए 284 सैंपल में से 56 सैंपल की रिपोर्ट अब तक विभाग को नहीं मिल सकी है। ऐसे में विभाग के लिए घटिया गुणवत्ता की खाद्य सामग्री की पहचान करना और इसकी बिक्री को रोकना चुनौती से कम नहीं है।
खाद्य सुरक्षा विभाग के अनुसार वर्ष 2022 में जिले भर की कई दुकानों से दूध, पनीर, मसाले, तेल सहित अन्य खाद्य सामग्री के 162 सैंपल भरे गए थे जिन्हें जांच के लिए प्रयोगशाला भेजा गया। इनमें से 24 नूमने फेल मिले और विभाग ने संबंधित व्यापारियों पर 60 हजार का जुर्माना लगाया। वर्ष 2023 में अब तक 122 सैंपल लिए गए हैं जिनमें से छह सैंपल फेल हुए हैं। संबंधित व्यापारियों से विभाग ने 3.50 लाख रुपये का जुर्माना वसूला है। हैरानी की बात ये है कि इनमें से 56 नमूनों की जांच प्रयोगशाला में अटकी है जिसका विभाग को इंतजार है। विभाग के लिए खाद्य सामग्री की गुणवत्ता परखना और घटिया सामग्री की बिक्री रोकना मुश्किल है। समय पर रिपोर्ट नहीं मिलने से लोगों को घटिया गुणवत्ता की सामग्री पहुंच रही है जिसे गंभीरता से नहीं लिया जा रहा है। संवाद
खाद्य सुरक्षा अधिकारी नहीं, दुकानों तक पहुंच हुई मुश्किल
अल्मोड़ा। खाद्य सुरक्षा विभाग के मुताबिक जिले में 3546 प्रतिष्ठान विभाग में पंजीकृत हैं। बगैर पंजीकरण के संचालित प्रतिष्ठानों की संख्या इससे कई गुना अधिक है। विभाग के लिए इन दुकानों तक पहुंचना किसी चुनौती से कम नहीं है। ऐसा इसलिए है कि जिले में सहायक खाद्य सुरक्षा के स्वीकृत चार पदों के सापेक्ष सभी रिक्त चल रहे हैं। एकमात्र खाद्य सुरक्षा अधिकारी के लिए सभी दुकानों तक पहुंच बनाते हुए खाद्य सामग्री की गुणवत्ता को परखना इन हालात में मुश्किल है।
विभाग लगातार खाद्य सामग्री की जांच करता है। इसके लिए अभियान भी चलाया जाता है। अधिकारियों की कमी है। इसके बाद भी लोगों को गुणवत्तापरक खाद्य सामग्री उपलब्ध हो, इसके गंभीरता से प्रयास किए जा रहे हैं।
नंद किशोर, खाद्य सुरक्षा अधिकारी, अल्मोड़ा।