चिलियानौला पालिका का विहंगम दृश्य। संवाद
रानीखेत (अल्मोड़ा)। नगर पालिका बन चुके चिलियानौला कस्बे में पर्यटन विकास की अवधारणा को अभी तक पंख नहीं लग सके हैं। यहां पर्यटन की अपार संभावनाएं हैं। विश्वविख्यात हैड़ाखान आश्रम में साल भर देश-विदेश से श्रद्धालु पहुंचते हैं लेकिन पालिका को जोड़ने वाली सड़कों की हालत नहीं सुधर सकी है। जगह-जगह वार्डों में पेयजल लाइनें आज भी अस्त-व्यस्त हैं।
चिलियानौला क्षेत्र प्राकृतिक रूप से काफी सुंदर है। यहां से हिमालय की लंबी श्रृंखलाओं के दीदार होते हैं। पर्यटन बढ़ाने को लेकर पूर्व में स्वीकृत चिलियानौला-खनियां के लिए प्रस्तावित रोप-वे को एक दशक बाद भी मंजूरी नहीं मिल सकी है। यदि यहां पर्यटन स्थलों का विकास हो तो पर्यटकों की संख्या काफी बढ़ सकती है।
पूर्व में यह क्षेत्र बधाण ग्राम पंचायत का हिस्सा था जिस कारण सफाई व्यवस्था ठीक नहीं थी। वर्ष 2018 में नगर पालिका अस्तित्व में आने के बाद सबसे पहले सफाई व्यवस्था में अमूल चूक परिवर्तन हुआ। अब यहां डोर टू डोर कूड़ा उठता है। लेकिन कई वार्डों में बिछी पेयजल पाइप लाइनें अस्त-व्यस्त हैं। वर्ष 2012 में यहां खनियां से चिलियानौला के लिए रोप-वे बनाने की मांग उठी। तत्कालीन मुख्यमंत्री हरीश रावत ने इस संबंध में प्रयास भी किया था लेकिन इसके बाद यह मामला भी ठंडे बस्ते में है। वरिष्ठ व्यवसायी बिपिन शर्मा कहते हैं कि यदि यहां पर्यटन के क्षेत्र में ध्यान दिया जाए तो यह कस्बा पर्यटन कस्बे के रूप में विकसित हो सकता है।
कोट
चिलियानौला पालिका क्षेत्र में पर्यटन विकास की अपार संभावनाएं हैं। यहां सेल्फी प्वाइंट विकसित करने का विचार किया जा रहा है। भूमि की तलाश की जा रही है। इसके अलावा पालिका ने कई स्ट्रीट लाइटें और फैंसी लाइटें भी लगाई हैं। क्षेत्र को पर्यटन के रूप में विकसित करने की कवायद जारी है। -प्रवीण कुमार सक्सेना, ईओ, नगर पालिका, चिलियानौला।