अल्मोड़ा। उत्तरकाशी के द्रौपदी का डांडा में चार अक्तूबर को हिमस्खलन की घटना में जान गंवाने वाले प्रशिक्षु पर्वतारोही शुभम सांगुुड़ी का रविवार को पैतृक गांव के श्मशान घाट में अंतिम संस्कार किया गया। लमगड़ा ब्लॉक के अंतर्गत सांगड़ साहू निवासी दीवान सिंह सांगुड़ी का परिवार वर्तमान में नैनीताल में रहता है।
उत्तरकाशी मेंपर्वतारोहण अभियान के दौरान शुभम लापता हो गए थे। शनिवार को उनका शव बरामद हो गया था। रविवार सुबह परिजन उत्तरकाशी से शुभम का शव लेकर करीब साढ़े आठ बजे सांगड़ साहू पहुंचे। घटना के बाद से शुभम के चाचा-चाची और अन्य परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल था। पंच देवलेश्वर श्मशान घाट में गमगीन माहौल में युवा पर्वतारोही का अंतिम संस्कार किया गया।
चिता को शुभम के चाचा चंदन सिंह सांगुड़ी ने मुखाग्नि दी। शुभम अविवाहित थे। घर में परिजनों को सांत्वना देने वालों का तांता लगा रहा। शवयात्रा में जागेश्वर विधायक मोहन सिंह मेहरा, प्रशासन से कानूनगो/राजस्व उप निरीक्षक नंदन बिष्ट, प्रधान संजय सिजवाली, मोहन सिंह, गोविंद सिंह, नारायण सिंह, नरेंद्र सिंह, नंदन सिंह आदि शामिल हुए।
श्मशान घाट में टिन शेड न होने से परेशान रहे लोग
अल्मोड़ा। पंच देवलेश्वर श्मशान घाट में लकड़ी का टाल और टिनशेड नहीं है। इस कारण यहां शवदाह करने आने वाले लोगों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। खासकर बारिश होने पर टिनशेड न होने से लोगों को अधिक परेशानी झेलनी पड़ती है। लमगड़ा तहसील का यह सबसे बड़ा श्मशान घाट है। हरीश सिंह कपकोटी समेत अन्य ग्रामीणों ने श्मशान घाट में टीन शेड बनाने की मांग की है। संवाद
बेटे की शादी के अरमान रह गए अधूरे
दीवान सिंह ने ढाई साल पूर्व खोई थी पत्नी
राजेंद्र धानक
अल्मोड़ा। शुभम के अचानक दुनिया छोड़कर जाने से दीवान सिंह सांगुड़ी के घर का इकलौता चिराग बुझ गया। जवान बेटे की मौत से पिता पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। घटना से पिता का बेटे की शादी करने का सपना अधूरा रह गया है।
लमगड़ा ब्लॉक के सांगड़ साहू निवासी दीवान सिंह सांगुड़ी टैक्सी चलाकर अपने परिवार का भरणपोषण करते हैं। करीब ढाई साल पहले उनकी पत्नी कमला का निधन हो गया था। पत्नी की मौत से टूट चुके दीवान ने खुद को संभाला और अकेले ही बच्चों की परवरिश करने लगे। अब बेटे को खोने के गम में वह बेसुध हैं। बुढ़ापे में शुभम ही उनका सहारा था। शुभम की शादी को लेकर उन्होंने कई सपने देखे थे लेकिन एक झटके में उनका सब कुछ बिखर गया। अब परिवार में वह और उनकी बेटी रह गई है। संवाद
पर्यटन में किया था एमबीए
अल्मोड़ा। शुभम सांगुड़ी ने एमबीए (पर्यटन) की पढ़ाई की थी। उन्हेें पर्वतारोहण से प्यार था। वह नेहरू पर्वतारोहण संस्थान (निम) से एडवांस कोर्स कर रहे थे। चार अक्तूबर को द्रौपदी का डांडा में हुई हिमस्खलन की घटना में वे लापता हो गए थे।
शुभम ने घटना वाले दिन से सात दिन पूर्व फोन पर अपने पिता से बात की थी। कहा कि वह नौ या 10 अक्तूबर को घर पहुंच जाएंगे। इसके बाद उनकी अपने परिजनों से कोई बात नहीं हुई।
शुभम का पिता से घर लौटने का वादा पूरा नहीं हो सका। हंसमुख और मिलनसार स्वभाव के शुभम की मौत से उसके दोस्त भी दुखी हैं। बताया जा रहा है पुणे की एक कंपनी में शुभम का चयन हो गया था। परिवार में भी इस बात की खुशी थी लेकिन शुभम नई नौकरी को ज्वाइन नहीं कर पाए। संवाद