अल्मोड़ा। जिले की नाप भूमि और वन पंचायत के जंगलों से अधिक पेड़ों के कटान का मामला सामने आया है। वन विभाग ने तीन साल में ही 12,000 पेड़ों के कटान की अनुमति दे दी। विभाग की नींद खुली तो प्रथम दृष्ट्या जांच में अवैध कटान की आशंका जताई जा रही है। इसलिए अब पेड़ कटान पर रोक लगा दी गई है। मामले की जांच के लिए तीन सदस्यीय कमेटी गठित की गई है।
कुछ पर्यावरण प्रेमियों ने जिले में पेड़ों के अंधाधुंध कटान की शिकायत प्रमुख मुख्य वन संरक्षक विनोद कुमार से की थी। मामले की गंभीरता को देखते हुए इसकी जांच मुख्य वन संरक्षक पीके पात्रो को सौंपी गई। पता चला कि वन पंचायत और नाप भूमि पर पेड़ों को काटने की अनुमति डीएफओ ने दी थी। अब पेड़ कटान पर रोक लगाते हुए जांच के लिए मुख्य वन संरक्षक पीके पात्रो की अध्यक्षता में कमेटी गठित की गई है। इस कमेटी में हल्द्वानी में तैनात वरिष्ठ सांख्यिकी अधिकारी और तराई पश्चिमी वन प्रभाग के एक एसडीओ भी शामिल हैं।
डीएफओ से छीना अनुमति का अधिकार
प्राथमिक तौर पर विभाग ने कार्रवाई कर डीएफओ से पेड़ कटाने की अनुमति देने का अधिकार छीन लिया है। अब डीएफओ पेड़ों के कटान की अनुमति नहीं दे सकते। इसके लिए विशेष परिस्थितियों में मुख्य वन संरक्षक स्तर से ही अनुमति लेनी होगी।
वसूला जाएगा जुर्माना
अल्मोड़ा। जांच अधिकारी मुख्य वन संरक्षक पीके पात्रो ने कहा कि अल्मोड़ा जिले में पेड़ कटान से संबंधित पत्रावली मांगी जा रही है। वन पंचायत स्तर से जारी अनुमति को भी परखा जाएगा। इसी आधार पर आरोपियों से जुर्माना वसूला जाएगा।
स्थलीय निरीक्षण के लिए बनेगी नई टीम
अल्मोड़ा। बेतरतीब हुए पेड़ कटान की सत्यता परखने के लिए स्थलीय निरीक्षण भी किया जाएगा। मुख्य वन संरक्षक पीके पात्रो ने कहा कि मौके पर जाकर स्थिति को देखा जाएगा। इसके लिए नई टीम का गठन का मौके पर भेजा जाएगा।
अल्मोड़ा में पेड़ कटान के मामले की जांच की जा रही है। पहले चरण में पेड़ कटान से संबंधित सभी दस्तावेज मांगे गए हैं जिनकी जांच की जाएगी। इसके बाद स्थलीय निरीक्षण होगा। - पीके पात्रो, मुख्य वन संरक्षक, नैनीताल।