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Almora News: बाड़ेछीना में बाजार में बेखौफ घूम रहे बंदर, दुकानदार पिंजरे में कैद

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बाड़ेछीना में बंदरों के आतंक से परेशान दुकानदारों ने इस तरह लगानी पड़ी है अपने प्रतिष्ठानों में ? - फोटो : ALMORA
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बाड़ेछीना(अल्मोड़ा)। बंदर पहाड़ी क्षेत्रों में बढ़ी समस्या बनते जा रहे हैं। अल्मोड़ा के बाड़ेछीना में भी बंदरों के आतंक से आम लोगों के साथ ही व्यापारी भी खासे परेशान है। हालात यह हैं कि लोग घरों में कैद हैं तो दुकानदार पिंजरों में और बंदर बेखौफ चहलकदमी कर रहे हैं। यहां बंदर घरों व दुकानों के भीतर घुसकर लोगों पर हमला कर रहे हैं तो सामान भी उठाकर ले जा रहे हैं, जिससे हर कोई परेशान है।
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बाड़ेछीना में इन दिनों बंदरों का आतंक बढ़ गया है। बंदरों का झुंड राह चलने वालों के साथ ही घरों में रहने वाले लोगों पर हमला कर रहे हैं, जिससे उनमें दहशत है। हालात यह हैं कि स्थानीय लोगों के साथ ही पर्यटकों ने अकेले घरों, होटलों से बाहर निकलना बंद कर दिया है। वहीं बच्चों का अकेले घर से बाहर निकलना मुश्किल हो गया है। बंदर राह चलते लोगों के हाथों से सामान छीन रहे हैं। व्यापारी भी बंदरों के आतंक से खासे परेशान हैं। बंदर दुकानों के भीतर रखा सामान बेखौफ उठा रहे हैं, जिससे व्यापारियों को नुकसान झेलना पड़ रहा है। हैरानी की बात यह है कि होटलों में बैठे लोगों की थालियों से बंदर खाना छीनकर ले जा रहे हैं। ऐसे में बंदरों के इस आतंक से मुक्ति पाने के लिए व्यापारियों ने हजारों रुपये खर्च कर दुकानों के आगे जाली लगानी पड़ी है और वे पिंजरे के भीतर कैद होकर रह गए हैं। बावजूद इसके इनके आतंक से निजात दिलाने के प्रयास नहीं हो रहे, जिससे स्थानीय लोगों व व्यापारियों में खासा आक्रोश है।
जंगलों में छोड़े जा रहे हैं बंदर
बाड़ेछीना। स्थानीय लोगों का आरोप है कि जिले के विभिन्न हिस्सों में आतंक का पर्याय बने बंदरों को पकड़कर बाड़ेछीना व आसपास के जंगलों में छोड़ा जा रहा है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि अल्मोड़ा में बधियाकरण कर बंदरों को धौलछीना के पास के बिनसर जंगल में छोड़ा जा रहा है। वहां से यहां पहुंचे ये बंदर लोगों के लिए परेशानी खड़ी कर रहे हैं।
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हर रोज चार से अधिक लोग पहुंच रहे हैं अस्पताल
बाड़ेछीना। पीएचसी बाड़ेछीना के डॉ. संजीव शुक्ला ने कहा क्षेत्र में बंदरों का आतंक बढ़ गया है। कहा हर रोज बंदरों के काटने से चार से अधिक लोग अस्पताल पहुंच रहे हैं। उन्होंने कहा बंदरों के काटने से रैबीज सहित अन्य गंभीर बीमारी हो सकती है। ऐसे में पीड़ितों को रैबीज की वैक्सीन लगानी चाहिए। उन्होंने बताया। छत पर रखीं टंकियों को ढककर रखना चाहिए। यदि बंदर इस पानी को पी लें तो इससे बीमारी हो सकती है।
कोट- बंदरों का बधियाकरण किया जा रहा है। धौलछीना व बिनसर के जंगलों में बंदर छोड़े जाने की जानकारी नहीं है। यदि ऐसा है तो जांच कर संबंधित के खिलाफ कार्रवाई होगी। बधियाकरण के बाद पकड़े गए स्थानों पर ही बंदरों को छोड़ने का नियम है।
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ध्रुव सिंह मर्तोलिया, डीएफओ, सिविल सोयम, अल्मोड़ा।
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