द्वाराहाट (अल्मोड़ा)। रिस्कन घाटी की मूलभूत समस्याओं का निराकरण न होने से संघर्ष समिति और स्थानीय ग्रामीणों में भारी आक्रोश है। समिति के नेतृत्व में ग्रामीणों ने नारेबाजी कर वृहद आंदोलन की चेतावनी दी है। कहा कि देवेश्वर मंदिर के पास मिनी डैम निर्माण के लिए लघु सिंचाई विभाग का आश्वासन आठ साल बाद भी पूरा नहीं हुआ है।
समिति के अध्यक्ष हरवंश बिष्ट की अध्यक्षता में बेढुली में रविवार को हुई बैठक में प्रशासन और विभागीय अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर आक्रोश जताया गया। कहा कि क्षेत्र की बिजली, पानी, स्वास्थ्य आदि मूलभूत सुविधाएं दिलाने के लिए कई वर्षों से गुहार लगाई गई लेकिन मांग पूरी नहीं हो सकी।
समिति के पदाधिकारियों ने कहा कि फल्द्वाड़ी, बयेला के उद्गम स्थल देवेश्वर मंदिर के पास मिनी डैम बनाने के लिए लघु सिंचाई विभाग ने आठ वर्ष पहले 2015 को एक माह में कार्यवाही शुरू करने का आश्वासन दिया था लेकिन आठ वर्ष बाद भी कोई कार्यवाही न होने पर गहरी चिंता जताई गई। पर्यटन विभाग से विमांडेश्वर मंदिर पर बनाए गए बैराज के जीर्णोद्धार और सुधारीकरण की मांग की गई।
बैठक में बैराज के फाटक न खुलने, फर्श टूटने, वहां बिछाए गए पत्थर उखड़ने, मंदिर परिसर में बने शौचालय के लिए मार्ग बनाने, बैराज में बरसात में आने वाली गंदगी सिल्ट को रोकने के लिए उसके ऊपर वायर क्रेट वाला चेकडाम बनाने, पैठानी नहर का जीर्णोद्धार कर उसकी सहायक नहरों के निर्माण समेत बिजली के झूलते तारों को कसने, लाइनों को छू रहे पेड़ों की लॉपिंग, सिमलगांव, सुरईखेत के पशुपालन केंद्रों में कर्मचारियों की नियुक्ति, खाद्य सुरक्षा योजना तहत चावल के साथ ही पर्याप्त मात्रा में गेहूं भी दिलाने की मांग की गई। बैठक में संघर्ष समिति के उपाध्यक्ष जीवन सिंह, सचिव रमेश चंद्र पुजारी, महासचिव नवीन कांडपाल, सदस्य महेश पंत, मोहन चंद पुजारी, शेर सिंह आदि मौजूद थे।