अल्मोड़ा/चौखुटिया। जिले में बारिश से जनजीवन पटरी से उतर गया है। बीते दो दिनों से रुक-रुककर बारिश जारी है। जिला मुख्यालय में बीते 24 घंटों में 8.5 एमएम और जैंती में सबसे अधिक 26 एमएम बारिश रिकार्ड की गई। लगातार बारिश होने से तापमान में पांच डिग्री की भी गिरावट आई है जिससे ठंड बढ़ गई है। जिले में मंगलवार को सुबह से ही झमाझम बारिश शुरू हो गई। बारिश के बीच लोग घरों से कम ही बाहर निकले। बाजार, रास्तों और गलियों में सन्नाटा पसरा रहा। जिला मुख्यालय में बीते 24 घंटों में 8.5 एमएम बारिश रिकार्ड की गई। ठंड से बचने के लिए लोगों को गर्म कपड़ों के साथ ही ब्लोअर और हीटर का सहारा लेना पड़ रहा है। आपदा प्रबंधन विभाग के मुताबिक बीते सोमवार यहां का अधिकतम तापमान 17 डिग्री और न्यूनतम 8 डिग्री था। वहीं मंगलवार को अधिकतम तापमान 12 डिग्री और न्यूनतम तापमान 7 डिग्री रिकार्ड किया गया।
इधर चौखुटिया क्षेत्र में दो दिनों से लगातार हो रही बारिश से ठंड काफी बढ़ गई है। काश्तकारों ने बारिश को गेहूं की फसल के लिए अच्छा संकेत बताया है। जानकारों का कहना है कि बारिश यदि कुछ दिन और जारी रही तो फिर सरसों व लाही की फसल के लिए समस्या पैदा हो सकती है। इधर क्षेत्र में कहीं भी ओलावृष्टि न होने से भी कृषकों को राहत है।
सड़कों और बाजार में जलभराव होने से लोग परेशान
अल्मोड़ा। बारिश ने नगर के ड्रेनेज प्लान की भी पोल खोल दी है। पानी की उचित निकासी न होने से मुख्य बाजार सहित अन्य सड़कों पर जलभराव हो गया। पटाल बाजार, माल रोड, कारखाना बाजार सहित अन्य हिस्सों में बारिश का पानी सड़कों पर बहता रहा जिससे लोगों को आवाजाही में परेशानी का सामना करना पड़ा। संवाद
जिले के विभिन्न हिस्सों में बारिश का आंकड़ा
अल्मोड़ा- 8.5 एमएम
जैंती - 26 एमएम
रानीखेत- 7 एमएम
द्वाराहाट- 24 एमएम
चौखुटिया- 8 एमएम
सोमेश्वर- 8 एमएम
भिकियासैंण- 8.5 एमएम
जागेश्वर- 16 एमएम
ताकुला- 15 एमएम
सल्ट- 9 एमएम
भैंसियाछाना- 13 एमएम
बागेश्वर में ऊंचाई वाले इलाकों में गिरी बर्फ, निचले क्षेत्रों में झमाझम बारिश
बागेश्वर। जिले में मौसम का मिजाज बदलने से तापमान में काफी गिरावट आ गई है। ऊंचाई वाले इलाकों में बर्फबारी हो रही है जबकि निचले इलाकों में झमाझम बारिश का सिलसिला जारी है। बारिश के चलते जिले का अधिकतम तापमान नौ डिग्री गिरकर 14 डिग्री सेल्सियस पर पहुंच गया है। ठंड से बचाव के लिए लोग गर्म कपड़ों का सहारा ले रहे हैं। कपकोट के ग्रामीण इलाकों में अलाव जलाकर लोग ठंड से बचाव कर रहे हैं।
सोमवार की शाम को जिले में बारिश का सिलसिला शुरू हुआ जो लगातार जारी है। मंगलवार को पूरे दिन जिले में बारिश होती रही। कपकोट के पिंडर घाटी क्षेत्र के फुरकिया, चिल्ठा टॉप और जांतोली गांव की ऊंची पहाड़ियों में हल्का हिमपात हुआ। लगातार हो रही बारिश ने ठंड काफी बढ़ गई है। मार्च के महीने में लोगों को जनवरी के दिनों का अहसास हो रहा है। बारिश ने लोगों के रोजमर्रा के कामकाज पर भी असर डाला। बाजारों में अन्य दिनों की अपेक्षा कम भीड़ होने से व्यापारियों का कारोबार भी प्रभावित हुआ। लगातार हो रही बारिश से निचले इलाके में खेतों में जलभराव की परेशानी भी हो रही है।
चैत्र में होने वाली बुआई के लिए अच्छी है बारिश : डॉ. पांडेय
बागेश्वर। मार्च में हो रही बारिश कुछ किसानों के लिए लाभकारी तो कुछ के लिए नुकसानदायक है। कृषि विज्ञान केंद्र काफलीगैर के प्रभारी डॉ. कमल कुमार पांडेय ने बताया कि चैत्र की बुआई के लिए इस समय बारिश होनेे बेहद लाभकारी है। असिंचित क्षेत्रों में बोए गए गेहूं के लिए भी बारिश अच्छी है। सिंचित क्षेत्र के गेहूं की पैदावार के लिए भी बारिश अच्छी है लेकिन खेत में जलभराव होगा तो पौधे को नुकसान होगा। मसूूर के लिए भी बारिश लाभदायक है। हालांकि धनिया और मटर तैयार कर रहे किसानों को यह बारिश नुकसान करेगी। उन्होंने बताया कि पांच दिनों में जिले में 21.4 मिमी बारिश दर्ज की गई है। अगर अगले चौबीस घंटे में 25 मिमी तक बारिश होती है तो इससे आम की बौर समेत इस मौसम में लगने वाले फलों को नुकसान हो सकता है। संवाद
वन कर्मियों के लिए राहत बनकर आई है बारिश
बागेश्वर। अमूमन मार्च में तापमान बढ़ने के साथ वनाग्नि की घटनाओं में भी बढ़ोतरी होती है और वन कर्मियों के लिए वनों को बचाना चुुुनौती बना रहता है। इस बार हो रही बारिश ने वन विभाग के कर्मचारियों को बड़ी राहत दी है। मार्च के दूसरे पखवाड़े की शुरुआत से बारिश हो रही है। अधिकांश वन क्षेत्र में लगने वाली आग बारिश से बुझ रही है। मौसम के बदले मिजाज ने वन विभाग के कर्मचारियों और फायर वॉचरों की मुश्किलों को कम किया है। संवाद
सूख रहे जलस्रोतों में बढ़ेगा पानी
बागेश्वर। जिले में हो रही झमाझम बारिश जमीन की नमी को बरकरार रखने में कारगर साबित हो रही है जिसका सकारात्मक असर सूखते जलस्रोतों पर भी पड़ेगा। बास्ती गांव के छह जलस्रोतों का पानी मार्च में ही कम हो गया था। कांडा, कपकोट, दुग नाकुरी और गरुड़ के कई अन्य जलस्रोतों में भी पानी का घटता स्तर चिंता बढ़ा रहा था। हालांकि भीषण गर्मी पड़ने से पहले हुई बारिश इन जलस्रोतों के लिए वरदान बनकर आई है। लगातार हो रही बारिश से जलस्रोतों के जलस्तर में बढ़ोतरी होनी निश्चित है। संवाद