इस तरह से जल स्तर गिर रहा है जीवनदायिनी गगास नदी का। संवाद
द्वाराहाट (अल्मोड़ा )। उक्रांद के थिंक टैंक और पूर्व विधायक स्व. बिपिन त्रिपाठी के बहुआयामी प्रोजेक्ट पिंडर नदी का पानी गगास और रामगंगा नदियों में छोड़े जाने की वर्षों पुरानी मांग फिर एक बार सुर्खियों में आने लगी है। कैड़ारौ घाटी के युवाओं ने भी गगास नदी के गिरते जल स्तर को देखते हुए पिंडर नदी का पानी दोनों नदियों में छोड़े जाने की वकालत की है। लोगों का कहना है कि यदि इन नदियों में पानी छोड़ा गया तो इनसे जुड़ी पेयजल और सिंचाई योजनाओं को लाभ मिलेगा। गगास नदी से ही रानीखेत और द्वाराहाट क्षेत्र के लिए दर्जन भर से अधिक पेयजल योजनाएं संचालित हैं।
बता दें कि पूर्व विधायक स्व बिपिन त्रिपाठी ने पिंडर नदी का पानी गगास और रामगंगा नदियों में छोड़े जाने का प्रस्ताव तैयार किया था। जिसमें उन्होंने बागेश्वर, ग्वालदम की पहाड़ी वाले भू-भाग के ऊपरी चोटी में स्टोरेज टैंक बना कर टनल के माध्यम से पानी रामगंगा और गगास में छोड़े जाने का प्रस्ताव शासन में सौंपा था। उनके निधन के बाद फाइल पर कोई कार्रवाई नहीं हो पाई। वर्ष 1982-83 में अविभाजित उत्तर प्रदेश के तत्कालीन सिंचाई मंत्री लोकपति त्रिपाठी जब यहां क्षेत्र भ्रमण पर आए तब क्षेत्रवासियों ने इस प्रकरण को भी उनके सम्मुख रखा था। तब मंत्री ने पिंडर के जल से 2000 क्यूसेक जल अल्मोड़ा जिले के लिए आरक्षित करने के निर्देश भी दिए थे।
क्षेत्र के सामाजिक कार्यकर्ता और तत्कालीन युवक मंगल दल अध्यक्ष कैलाश लाल साह पूर्व से इस बहुआयामी योजना के क्रियान्वयन को लेकर लगातार जनप्रतिनिधियों से गुजारिश करते आ रहे हैं। उन्होंने 1983 में शासन प्रशासन को भेजे ज्ञापन की प्रतियां भी जनप्रतिनिधियों के माध्यम से उत्तराखंड मुख्यमंत्री तक भी भेजी, लेकिन कोई सार्थक पहल न हुई। अब उन्होंने युवाओं को साथ लेकर इस मुहिम को आगे लाने का अभियान शुरू कर दिया है। जिसमें साह के अलावा ललित कैड़ा, महेश कैड़ा, ललित चौधरी, मोहन सिंह अधिकारी, पूरन कैड़ा आदि शामिल हैं।
संवाद फोटो: 30 आरकेटी 03पी: इस तरह से गिर रहा है गगास नदी का जल स्तर