अल्मोड़ा। नगर में रोजाना 16 एमएलडी पानी की जरूरत है। इसके सापेक्ष 11 एमएलडी पानी ही मिल पा रहा है। ऐसे में गर्मियों के दिनों में हर साल पानी की किल्लत बनी रहती है।
कोसी नदी में बैराज बनने के बाद भी अल्मोड़ा के लोगों को पानी के संकट से जूझना पड़ रहा है। कोसी नदी में लगे तीन पंपों से नगर और आसपास के क्षेत्रों में करीब एक लाख तीस हजार आबादी को जल संस्थान पानी की आपूर्ति करता है। अल्मोड़ा शहर और आसपास के क्षेत्रों में राजाना 16 एमएलडी पानी की जरूरत है लेकिन जल संस्थान सिर्फ 11 एमएलडी पानी ही उपलब्ध करा पा रहा है। खासकर गर्मी के सीजन में नगर और आसपास के क्षेत्रों में लोगों को गंभीर पेयजल संकट का सामना करना पड़ता है। पेयजल पंप पुराने होने से कई बार यह खराब भी हो जाते हैं। खासकर बरसात के मौसम में पंपों के नदी में डूब जाने से तीन से चार दिन तक पेयजल आपूर्ति ठप हो जाती है। जल संस्थान से मिली जानकारी के मुताबिक अभी सभी पेयजल लाइनें दुरुस्त हैं।
एक माह में कोसी का जलस्तर कम होकर 71.50 क्यूसेक पहुंचा
अल्मोड़ा। कोसी नदी के जलस्तर में गिरावट आई है। पिछले माह 14 फरवरी को कोसी का जलस्तर 90.50 क्यूसेक दर्ज किया गया था जो 14 मार्च को 71.50 क्यूसेक दर्ज किया गया। 14 मार्च 2021 को कोसी का जलस्तर 76.50 क्यूसेक था जबकि 14 मार्च 2022 को 66.50 क्यूसेक था। यदि बारिश नहीं हुई तो गर्मी के मौसम में कोसी नदी का जलस्तर और कम होने की आशंका है।
सिविल सोयम वन प्रभाग ने एक साल में रोपे 22,000 पौधे
अल्मोड़ा। वन प्रभाग सिविल सोयम ने एक साल में 20 हेक्टेयर जंगल में 22,000 नए पौधे लगाए। डीएफओ ध्रुव मर्तोलिया ने बताया कि पिछले एक साल में एक भी पेड़ का कटान नहीं हुआ है।
अल्मोड़ा नगर को रोजाना 16 एमएलडी पानी की जरूरत है। वर्तमान में जरूरत के सापेक्ष 11 एमएलडी पानी की ही आपूर्ति हो पा रही है। पेयजल व्यवस्था दुरुस्त रखने के लिए विभाग प्रयासरत है। - अरुण कुमार सोनी, ईई, जल संस्थान, अल्मोड़ा।