सोमेश्वर (अल्मोड़ा)। चावल उत्पादन के लिए प्रसिद्ध सोमेश्वर घाटी के किसानों को मौसम का साथ नहीं मिल रहा है। धान की रोपाई शुरू हो गई है जबकि पर्याप्त बारिश नहीं हो रही और नहरें भी सूखी हैं। ऐसे में रोपाई का समय बीतने के साथ ही क्षेत्र के चार हजार से अधिक किसानों की चिंता बढ़ती जा रही है।
तहसील क्षेत्र के अर्जुनराठ, भानाराठ, मल्ला खोली, रतुराठ, जैचोली, पल्यूड़ा, टाना, रनमन, सुनाड़ी, कोटुली आदि 30 से अधिक गांवों के चार हजार से अधिक किसान चावल का उत्पादन कर अपनी आजीविका चलाते हैं। क्षेत्र का चावल अपने स्वाद के लिए विशेष पहचान रखता है। लाल चावल से तैयार खीर और सफेद चावल के भात का स्वाद हल्द्वानी, दिल्ली, लखनऊ सहित कई स्थानों के लोग लेते हैं।
आजकल क्षेत्र में धान रोपाई का समय शुरू हो गया है। खेतों में धान की पौध लहलहा रही है लेकिन पर्याप्त बारिश न होने से किसानों के लिए रोपाई करना मुश्किल हो रहा है। समय पर रोपाई न होने से उपज प्रभावित होने की आशंका है। इससे चिंतित किसान बारिश के राहत बनकर बरसने की उम्मीद लगाए हैं। सूखी नहरों में जल्द पानी चलने की उम्मीद में किसान बमुश्किल रोपाई कर रहे हैं। इसके बावजूद पर्याप्त बारिश न होने से उन्हें पौध तक बर्बाद होने का डर सता रहा है।
10 गांवों के उपजाऊ खेतों को सींचने वाली नहर नहीं सुधर सकी
सोमेश्वर (अल्मोड़ा)। तहसील क्षेत्र के झलोली, सर्पमाफी, भनाराठ, अर्जुनराठ, पपैरा, टाना, लछमपुर, सूपाकोट, सिरखेत, तल्ला बैगनिया के किसानों के दो हजार हेक्टेयर खेतों को सींचने के लिए सात किमी लंबी नहर का निर्माण वर्ष 1984 में किया गया लेकिन रखरखाव के अभाव में यह नहर दो साल पहले क्षतिग्रस्त हो गई जिसके सुधारीकरण के प्रयास नहीं हो सके हैं। इस कारण खेतों तक पानी पहुंचना बंद हो गया है और मायूस किसान बारिश पर निर्भर हैं। इस नहर के सुधारीकरण के लिए दो साल पहले भेजा गया 99,96,000 रुपये का प्रस्ताव सरकारी फाइलों में धूल फांक रहा है।
धान की रोपाई का समय शुरू हो गया है। बारिश के साथ ही जल स्रोतों और नदियों में भी पानी की कमी है। बारिश न होने पर निश्चित तौर पर रोपाई प्रभावित होगी और इसका असर उत्पादन पर भी पड़ेगा। - संजय भाकुनी, सहायक कृषि अधिकारी, सोमेश्वर।