अल्मोड़ा। पहले ही लंपी वायरस से जूझ रहे पशुओं को सुरक्षित बचाने की चुनौती का सामना कर रहे पशुपालन विभाग के लिए मुंहपका-खुरपका (फुट एंड माउथ डिजीज) बीमारी मुश्किल खड़ी कर सकती है। विभाग लंपी वायरस से बचाव के लिए जानवरों का टीकाकरण कर रहा है लेकिन उसके पास फुट एंड माउथ डिजीज (एफएमडी) की वैक्सीन उपलब्ध नहीं है जबकि गर्मी में ही यह बीमारी जानवरों में फैलती है। यदि जानवर एक साथ दोनों बीमारी से ग्रसित हुए तो ऐसे में पशुपालन विभाग मुश्किल में पड़ सकता है और लोगों को पशुधन का नुकसान होगा।
अल्मोड़ा जिले में लंपी वायरस से अब तक 557 जानवर बीमार हो चुके हैं और इनमें से 12 पशुओं की मौत हो चुकी है। पशुपालन विभाग को इस वायरस से सुरक्षित बचाने के लिए जिले भर में 1,60,000 जानवरों का टीकाकरण करना है। अब तक विभाग 53,847 जानवरों का टीकाकरण कर चुका है।
इसी बीच जानवरों के एफएमडी बीमारी से भी ग्रसित होने का खतरा पैदा हो गया है। ऐसे में पशुपालन विभाग के सामने जानवरों को सुरक्षित बचाकर किसानों को राहत पहुंचाने की दोहरी चुनौती है। विभाग के पास लंपी वायरस के पर्याप्त टीके उपलब्ध हैं। लेकिन एफएमडी के टीके की एक भी डोज जिले में मौजूद नहीं है। यदि दोनों बीमारियों का एक साथ हमला हुआ तो पशुपालन विभाग के लिए इनसे निपटना किसी चुनौती से कम नहीं होगा।
लंपी वायरस के 113 केस एक्टिव
अल्मोड़ा। पशुपालन विभाग के मुताबिक लंपी वायरस से ग्रसित जानवरों के जल्द ठीक होने से राहत है। अब तक इस वायरस से ग्रसित 432 जानवर इससे ठीक हो चुके हैं। वर्तमान में जिले में लंपी वायरस के 113 केस एक्टिव हैं।
एफएमडी की दो लाख टीकों की भेजी डिमांड
अल्मोड़ा। एफएमडी बीमारी को लेकर पशुपालन विभाग सतर्क हो गया है। हालांकि विभाग के पास इस बीमारी की वैक्सीन उपलब्ध नहीं है। लेकिन विभाग ने एफएमडी के दो लाख टीकों की डिमांड भेजी है, जिसके जल्द मिलने की उम्मीद है।
यह है एफएमडी बीमारी
- एफएमडी यानि खुरपका-मुंहपका रोग विषाणु जनित है। इसमें जानवरों के मुंह और खुरों में छाले पड़ जाते हैं और वे तेज बुखार से पीड़ित होते हैं। प्रभावित जानवर के मुंह से अत्यधिक लार टपकती है और वह चारा खाना बंद कर देता है। जानवरों का गर्भपात हो सकता है और बछड़ों की मौत हो सकती है।
बचाव के उपाय
अल्मोड़ा। इस रोग से प्रभावित जानवर को अन्य जानवरों से दूर किया जाना चाहिए। मुंह और खुरों को सोडियम कार्बोनेट के घोल से धोना जरूरी है। टीका इसके बचाव का एकमात्र उपाय है।
- लंपी वायरस की रोकथाम के लिए टीकाकरण चल रहा है। एफएमडी के टीके की मांग भेजी गई है। जल्द ही टीके उपलब्ध होंगे। पशुपालन विभाग तत्परता से काम कर रहा है। - डॉ. डीके शर्मा, उप मुख्य पशु चिकित्साधिकारी, अल्मोड़ा।
बागेश्वर जिले में नहीं थम रहा लंपी संक्रमण, 459 पशु अब भी उपचाराधीन
बागेश्वर। जिले में लंपी वायरस संक्रमण थम नहीं रहा है। अब तक लंपी वायरस से 19 मवेशी जान गंवा चुके हैं जबकि 459 संक्रमित पशुओं का पशुपालन विभाग की ओर से इलाज किया जा रहा है।
पूर्व में दुग नाकुरी और काफलीगैर तहसील के गांवों में मामले कम थे, लेकिन अब वायरस ने इन क्षेत्रों में भी पैर पसारना शुरू कर दिया है। लंपी स्किन डिजीज संक्रमण की रोकथाम के लिए पशु चिकित्सक गांव-गांव जाकर पशुओं का उपचार कर रहे हैं। जिले में 76,181 गोवंशीय पशु हैं, संवेदनशील की श्रेणी में हैं। अब तक 1877 मवेशी संक्रमित मिले हैं। 1199 मवेशी ठीक हो चुके हैं।
मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉ. आर चंद्रा ने बताया कि पशुपालकों को जागरूक किया जा रहा है। गांवों में चिकित्सकों के मोबाइल नंबर उपलब्ध कराए हैं। उन्होंने पशुओं बीमारी के लक्षण दिखने पर शीघ्र विभाग या पशु चिकित्सक को सूचना देने की अपील की है।
लावारिस गाय हमलावर हुई तो जागा छावनी परिषद प्रशासन
रानीखेत (अल्मोड़ा)। पर्यटन नगरी के नाम से मशहूर रानीखेत नगर में लावारिस पशु हमलावर हो रहे हैं। पिछले तीन दिन में एक गाय ने कई लोगों को घायल कर दिया है। सूचना पर छावनी परिषद प्रशासन के कर्मचारियों ने नगर में घूम रहे करीब 40 लावारिस पशुुओं को नगर से बाहर कर दिया। हालांकि पशुुओं को गोसदन भेजने को लेकर अभी तक कोई भी कार्यवाही नहीं हो सकी है।
नगर में लावारिस पशु लंबे समय से हमलावर हैं। इनके चलते शहर में कई बार जाम की स्थिति बन जाती है। वहीं हमेशा लोगों को हमला होने का डर सताता रहता है। शुक्रवार सुबह से छावनी परिषद की टीम नगर में घूम रहे लावारिस पशुओं को नगर से बाहर कालिका के जंगल में छोड़ दिया। छावनी परिषद की पहल से नागरिकों ने राहत की सांस ली है।
- लावारिस पशुओं के लिए गोसदन बाजपुर में वार्ता की गई है, लेकिन वहां जगह का अभाव है। जानवरों को लावारिस छोड़ने वालों के खिलाफ चालानी कार्रवाई भी की जा रही है। हमलावर गाय को भी फिलहाल नगर की सीमा से बाहर कर दिया है।-एपी सिंह, स्वच्छता निरीक्षक, छावनी परिषद रानीखेत।