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Almora News: पहाड़ के अस्पतालों में उपकरण खा रहे जंक, मरीज हो रहे तंग

Thu, 14 Sep 2023 12:20 AM IST
हल्द्वानी ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, अल्मोड़ा
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सल्ट विकासखंड का सीएचसी देवायल। संवाद
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अल्मोड़ा। जिले में स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार करने के तमाम दावे किए जा हैं जबकि हकीकत यह है कि अधिकतर अस्पतालों में एक्सरे मशीन जंक खा रही हैं और अल्ट्रासाउंड के लिए मरीज और गर्भवतियों को अन्य जिलों की दौड़ लगानी पड़ रही है। सल्ट, देघाट, भिकियासैंण, भतरौंजखान समेत अन्य क्षेत्रों के मरीजों को एक्सरे और अल्ट्रासाउंड जांच के लिए 55 किमी से 100 किमी तक का सफर तय कर रामनगर जाना पड़ रहा है। वहीं गर्भवतियों को निशुल्क अल्ट्रासाउंड जांच के लिए 300 से 500 रुपये खर्च करने पड़ रहे हैं।

जिले में लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए सल्ट, देघाट, भिकियासैंण, सिलांंगी, द्वाराहाट, चौखुटिया, धौलादेवी, जैंती और लमगड़ा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) खोले गए हैं। वहीं काकड़ीघाट, ताड़ीखेत, चमड़खान, हवालबाग, ताकुला, भैंसियाछाना, भतरौंजखान में प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (पीएचसी) बने हैं। लेकिन ये सभी अस्पताल मरीजों और गर्भवतियों की कसौटी पर खरे नहीं उतर पा रहे हैं।
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पीएचसी में न तो एक्सरे जांच की सुविधा है और ना ही अल्ट्रासाउंड की। सीएचसी भिकियासैंण, द्वाराहाट और चौखुटिया को छोड़ दे तो अन्य छह सीएचसी में कहीं भी अल्ट्रासाउंड जांच की सुविधा नहीं है। ऐसे में हर रोज इन सीएचसी और पीएचसी में अल्ट्रासाउंड जांच की जरूरत वाले 80 से 120 मरीजों और गर्भवतियों को हायर सेंटर रेफर कर दिया जाता है। मजबूर होकर उन्हें 50 से 120 किमी दूर जिला मुख्यालय की दौड़ लगानी पड़ रही है।

वहीं सल्ट, देघाट क्षेत्र के मरीज और गर्भवतियां अल्ट्रासाउंड के लिए 55 से 100 किमी दूर नैनीताल जिले के रामनगर की दौड़ लगाने के लिए मजबूर हैं। गर्भवतियों को निशुल्क अल्ट्रासाउंड के लिए किराये में ही 300 से 500 रुपये खर्च करने पड़ रहे हैं। संवाद

एक्सरे मशीन खा रही हैं जंक
अल्मोड़ा। स्वास्थ्य विभाग की ओर से मरीजों को राहत देने के लिए देघाट, सिलांगी, जैंती, लमगड़ा सीएचसी में करोड़ों की लागत से एक्सरे मशीन खरीदी गईं थीं। लेकिन तकनीशियन की तैनाती न होने से इनका संचालन नहीं हो सका। हालात यह हैं कि बगैर संचालन के एक्सरे मशीन जंक खाकर खराब हो गईं। अब स्वास्थ्य विभाग को तकनीशियन मिले तो यहां एक्सरे के लिए मशीन नहीं हैं और नई मशीन की मांग की गई है।

50 लाख का ऑक्सीजन जनरेशन प्लांट बना है शोपीस
अल्मोड़ा। कोराेना काल में भिकियासैंण सीएचसी में 50 लाख रुपये से ऑक्सीजन जनरेशन प्लांट स्थापित किया गया। लेकिन पर्याप्त स्टॉफ न होने से बीते छह माह से इसका संचालन ठप है। ऐसे में ऑक्सीजन की जरूरत वाले मरीजों को हायर सेंटर रेफर करना अस्पताल प्रबंधन की मजबूरी बन गया है।

अल्ट्रासाउंड मशीन खरीद ली पर रेडियोलॉजिस्ट का पद सृजित नहीं
अल्मोड़ा। द्वाराहाट और चौखुटिया सीएचसी में वर्ष 2004 में लाखों रुपये से अल्ट्रासाउंड मशीन खरीदी गईं। विभाग ने मशीन खरीदने में जल्दबाजी तो दिखाई मगर यहां रेडियोलॉजिस्ट का पद अब तक सृजित ही नहीं किया। इस वजह से सप्ताह में एक दिन रानीखेत उपजिला चिकित्सालय से रेडियोलॉजिस्ट को भेजकर मरीजों और गर्भवतियों के अल्ट्रासाउंड हो रहे हैं।

लोगों की पीड़ा
स्थानीय अस्पताल में न तो एक्सरे जांच हो रही है और ना ही अल्ट्रासाउंड की सुविधा है। इसके लिए गर्भवतियों और मरीजों को रामनगर जाना पड़ रहा है। पता नहीं बदहाल स्वास्थ्य व्यवस्थाओं से कब छुटकारा मिलेगा। -हेमा पांडे, चौनलिया, भतरौंजखान

अस्पतालों में स्वास्थ्य सेवाओं की बेहतरी के दावे किए जाते हैं पर होता कुछ नहीं। अगर एक्सरे और अल्ट्रासाउंड जांच की सुविधा हो जाती तो मरीजों को काफी राहत मिलती। लेकिन ऐसा नहीं हो रहा है। -जीवन रावत, हऊली, भतरौंजखान

मामूली उपचार के लिए भी हायर सेंटर की दौड़ लगानी पड़ रही है। सबसे बड़ी दिक्कत गर्भवतियों को झेलनी पड़ रही है। यदि स्थानीय स्तर पर उन्हें अल्ट्रासाउंड जांच की सुविधा मिलती तो ज्यादा अच्छा होता। -माधवी देवी, भिकियासैंण।

स्थानीय स्तर पर अस्पताल तो खोले गए हैं, लेकिन इनमें जरूरी सुविधाएं नहीं हैं। देवायल सीएचसी में अल्ट्रासाउंड जांच की सुविधा तक नहीं है। इस वजह से मरीज और गर्भवतियों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। - लक्ष्मी देवी, पैसिया, सल्ट
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कोट
अस्पतालों में सुविधाओं के विस्तार के लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। मरीजों को अच्छी स्वास्थ्य सुविधा मिलें, इसके गंभीरता से प्रयास होंगे। पहले की अपेक्षा अब स्वास्थ्य व्यवस्थाओं में खासा सुधार हुआ है। - डॉ. आरसी पंत, सीएमओ, अल्मोड़ा

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