अल्मोड़ा। विश्व प्रसिद्ध जागेश्वर धाम के विस्तार के लिए मास्टर प्लान को धरातल पर उतारने की कवायद तेज हो गई है। भू-वैज्ञानिकों की टीम ने यहां पहुंचकर जांच के लिए मिट्टी के नमूने लिए। सात स्थानों से नमूने लेकर इसे जांच के लिए रुद्रपुर स्थित लैब भेजा गया।
बदरीनाथ और केदारनाथ धाम की तर्ज पर जागेश्वर में भी मास्टर प्लान की कैबिनेट में मंजूरी मिली है। जागेश्वर का मास्टर प्लान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और सीएम पुष्कर सिंह धामी के ड्रीम प्रोजेक्ट में शामिल है। अहमदाबाद की आईएनआई कंसल्टेंसी इसका सर्वे कर चुकी है। इसी के तहत रविवार को बिल्डिंग क्रियेटर एंड कंसल्टिंग के सर्वेयर और रुद्रपुर एवं पंतनगर के भू-वैज्ञानिकों की टीम ने जागेश्वर में सात स्थानों पर खुदाई कर जांच के लिए मिट्टी के नमूने एकत्र किए जिन्हें जांच के लिए भेजा गया।
भू-वैज्ञानिक मनीष सिंह कोश्यारी ने बताया कि एक सप्ताह बाद रिपोर्ट आएगी जो कंसल्टेंसी को सौंपी जाएगी। उन्होंने बताया कि मिट्टी की क्षमता के अनुसार निर्माण कार्य होंगे। किसी भी भवन को तैयार करने के लिए सबसे पहले मृदा परीक्षण का प्रावधान है। इसी जांच रिपोर्ट के आधार पर भवनों का निर्माण किया जाता है। इसके तहत जमीन के भीतर चट्टान की क्षमता का आकलन भी किया जाता है।
पहले चरण में होगा विद्युतीकरण, जटा गंगा का होगा सौंदर्यीकरण
अल्मोड़ा। जागेश्वर धाम में मास्टर प्लान के तहत पहले चरण का कार्य जल्द शुरू होने की उम्मीद है। जानकारी के मुताबिक पहले चरण में मंदिर परिसर में विद्युतीकरण होगा। इसके अलावा लकड़ी से परिक्रमा पथ का निर्माण होगा। साथ ही जटा गंगा का सौंदर्यीकरण किया जाएगा। 125 मंदिर समूहों के जागेश्वर धाम में कंसल्टेंसी ने एक मंदिर में कार्य शुरू भी कर दिया है। संवाद