अल्मोड़ा। सांस्कृतिक नगरी की पहाड़ियों के बीच स्थित कसार देवी मंदिर पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित करता है। शांत वातावरण, प्राकृतिक सौंदर्य और आध्यात्मिक आस्था के लिए प्रसिद्ध इस मंदिर में हर वर्ष देश-विदेश से सैकड़ों पर्यटक पहुंचते हैं। मान्यता है कि यहां देवी मां साक्षात अवतरित हुई थीं। मंदिर क्षेत्र को लेकर चुंबकीय शक्तियों से जुड़ी मान्यताएं भी पर्यटकों के आकर्षण का कारण बनी रहती हैं। लेकिन लंबे समय से मंदिर के मुख्य द्वार पर स्थापित जर्जर शिलालेख पर्यटन विभाग की कार्य प्रणाली पर सवाल खड़े कर रहा है। विभाग की अनदेखी के चलते शिलालेख कई स्थानों पर क्षतिग्रस्त हो चुका है। हालत ये है कि शिलालेख पर लगी टायल्स भी उखड़ने लगी है। ऐसे में यहां पहुंचने वाले पर्यटकों के बीच मंदिर की छवि धूमिल हो रही है। पर्यटक शिलालेख के जरिए ही मंदिर के इतिहास के बारे में जानते हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि कसार देवी ऐतिहासिक और धार्मिक स्थल की पहचान विदेशों तक है। ऐसे में जर्जर शिलालेख को जल्द दुरुस्त किया जाना जरूरी है। मंदिर में पर्यटकों की बढ़ती आवाजाही को देखते हुए लोगों ने जल्द शिलालेख की मरम्मत कर परिसर के सुंदरीकरण की मांग उठाई है। ताकि पर्यटन कारोबार को गति मिल सके। पर्यटन विभाग के उपनिदेशक प्रदीप कुमार गौतम ने बताया कि शिलालेख करीब दस वर्ष पुराना है। इससे शिलालेख कई स्थानों पर क्षतिग्रस्त हो चुका है। जल्द शिलालेख के सुधारीकरण के प्रयास किए जाएंगे। ताकि इसका संरक्षण किया जा सके।