अल्मोड़ा। जिला जेल में अपनी मां के गुनाहों की सजा काट रहे करीब पौने दो साल के मासूम का भी एक दिन सितारा चमकेगा। जेल में मां के साथ रह रहे मासूम को इसकी बंद दीवारों से बाहर निकलने के लिए करीब साढ़े चार साल का और इंतजार करना पड़ेगा। पिता सहित अन्य परिजनों के प्रेम से वंचित मासूम को दुलार करने वाली उसकी मां और उसके साथ अन्य महिला कैदी भी उसके बाहर निकलने का इंतजार कर रही हैं, ताकि उसका जीवन बेहतर हो सके।
सास की हत्या करने की दोषी पिथौरागढ़ जिले की एक महिला को धारा 302 के तहत आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई और उसे अल्मोड़ा जेल में कैद किया गया। तब वह गर्भवती थी और नवंबर 2021 में उससे अस्पताल में एक पुत्र को जन्म दिया। जेल में ही उसका नामकरण हुआ, उसे नाम दिया गया। लेकिन मासूम ने अपनी मां के गुनाहों की सजा काटते हुए लगभग पौने दो साल गुजार लिए। नाम के मुताबिक जेल की बाहरी दुनिया में अपनी चमक बिखेरने के लिए उसे यहां से बाहर निकलना होगा, जिसके लिए इंतजार करना पड़ेगा। नियमों के मुताबिक छह वर्ष तक की उम्र तक उसे जेल में रखा जा सकता है। इसके बाद ही वह जेल की ऊंची दीवारों से परे बाहरी दुनिया देख सकेगा। संवाद
जेल में कैद हैं 13 महिलाएं
अल्मोड़ा। जिला जेल में वर्तमान में 13 महिला कैदी मौजूद हैं। इनमें से छह कैदी विचाराधीन जबकि सात दोषसिद्ध हैं। सभी महिलाओं का मासूम खूब चहेता है और वे इसे खूब प्रेम और दुलार करते हुए इसके बेहतर भविष्य की चिंता करती हैं।
कोट-
हत्या की दोषी महिला जेल में कैद है। इसका पुत्र भी उसके साथ रहता है। छह साल तक वह मां के साथ रह सकता है।
- जयंत पांगती, जेल अधीक्षक, जिला जेल, अल्मोड़ा।