रानीखेत। सरकार ने प्रवासियों की घर वापसी तो सुनिश्चित कर दी है और लोगों को स्क्रीनिंग के बाद उनके घरों में होम क़वारन्टीन कर दिया गया है। पर्वतीय ग्रामीण अंचलों में प्रवासियों को प्रधानों के माध्यम से होम क्वॉरेंटाइन करने के फरमान हैं, लेकिन ग्रामीण क्षेत्रों में लगभग प्रत्येक घरों में एक ही शौचालय है। क्षेत्र पंचायत सदस्य त्रिभुवन फर्त्याल का कहना है कि ग्रामीण क्षेत्र में सुविधाओं का भारी अभाव है। यदि प्रवासी को क़वारन्टीन किया जाता है तो उस शौचालय को प्रयोग करने का कोई औचित्य नहीं हैं। पंचायत भवनों में बिजली तक की सुविधा नहीं ,शौचालय तो दूर की कौड़ी हैं। राजकीय विद्यालयों में शौचालय की लगभग एकल व्यवस्था के साथ ही निकट भविष्य में बोर्ड की परीक्षाएं प्रस्तावित हैं। प्रशासनिक अमलीजामा लक्षण परिलक्षित होने पर ही संस्थागत क्वॉरेंटाइन करने की बात को कह रहे हैं, उन्होंने पूछा है कि क्या ये दुश्वारियाँ महामारी से निपटने में कारगर साबित होंगी।