अल्मोड़ा। जिले के अस्पतालों में स्वास्थ्य सेवाओं का बुरा हाल है। मरीजों का बेहतर इलाज हो इसके लिए डाक्टर तैनात किए गए। जिले भर के अस्पतालों में 23 डॉक्टर ऐसे हैं, जिन्होंने जॉइन किया और बाद में अचानक लापता हो गए। ये शिक्षक दोचार दिन से नहीं बल्कि वर्षों से गायब हैं। ये डॉक्टर कहां हैं... क्यों गैरहाजिर हैं... इसका विभाग को भी पता नहीं है। ऐसे में सवाल उठना लाजिनी है कि आखिल विभाग ऐसे लापरवाह चिकित्सकों पर कार्रवाई क्यों नहीं करता है। खामियाजा बेबस जनता को भुगतना पड़ रहा है।
स्वास्थ्य विभाग से मिले आंकड़ों के अनुसार जिले के महिला, जिला, बेस, रानीखेत उप जिला चिकित्सालय, नौ सीएचसी, छह पीएचसी, 59 अतिरिक्त प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में 290 चिकित्सकों के पद स्वीकृत हैं। इसके सापेक्ष 168 चिकित्सकों की तैनाती है। हैरानी की बात यह है कि पहले से ही चिकित्सकों की कमी से जूझ रहे इन अस्पतालों में 23 चिकित्सक ऐसे हैं जो वर्षों से गायब हैं। 10 नियमित के साथ ही 13 बांडधारी चिकित्सक गैरहाजिर हैं। विभाग भी दस्तावेजों में इन चिकित्सकों को अनुपस्थित दिखाकर अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ रहा है। संवाद
सेवा से बाहर नहीं होंगे तो नए चिकित्सकों की नियुक्ति नामुमकिन
अल्मोड़ा। भले ही ये चिकित्सक अस्पतालों से गायब हैं, लेकिन विभाग के रिकॉर्ड में उनकी अब भी नियुक्ति है। ये चिकित्सक सालों से अपने अस्पतालों में नहीं लौटे हैं। संबंधित अस्पतालों में इनकी नियुक्ति होने के कारण पदों को रिक्त नहीं माना जा सकता। ऐसे हालात में नए चिकित्सकों की नियुक्ति का रास्ता भी पूरी तरह बंद है। विभाग साल में एक बार मामले की सूचना निदेशालय को भेजकर औपचारिकता निभा रहा है।
गायब चिकित्सकों में विशेषज्ञ भी शामिल
अल्मोड़ा। ड्यूटी से गायब चिकित्सकों में विशेषज्ञ भी शामिल हैं। स्वास्थ्य विभाग के मुताबिक बेस अस्पताल में पैथोलॉजिस्ट, ईएनटी सर्जन, सीएचसी देवायल में महिला रोग विशेषज्ञ, जिला अस्पताल में निश्चेतक, हड्डी रोग विशेषज्ञ शामिल हैं।
पीजी करने गए 74 चिकित्सक
अल्मोड़ा। 74 चिकित्सकों के पीजी करने के लिए अस्पताल छोड़ने से स्वास्थ्य सेवाएं और चरमराईं हैं। ऐसे में मरीज परेशान हैं तो विभाग भी चिंतित है।
इन अस्पतालों से गैरहाजिर है चिकित्सक
बेस, जिला, सीएचसी देवायल, पीएचसी भैंसियाछाना, सराईखेत, स्याल्दे, जैंती, बसोली, ध्याड़ी, मानिला।
गायब चिकित्सकों की सूचना समय-समय पर निदेशालय को भेजी जाती है। निश्चित तौर पर इन पदों को जब तक रिक्त नहीं माना जाता, तब तक नए चिकित्सकों की तैनाती संभव नहीं है। - डॉ. आरसी पंत, सीएमओ, अल्मोड़ा।