अल्मोड़ा। पुरातन चिकित्सा पद्धति आयुर्वेद के प्रति लोगों का रुझान बढ़ा है। लेकिन जिले में आयुर्वेदिक चिकित्सा व्यवस्था की सेहत खराब है। जिले के आयुर्वेदिक अस्पतालों में चिकित्सकों के 10 पद रिक्त चल रहे हैं। इस कारण इलाज के लिए आने वाले मरीज बैरंग लौट रहे हैं।
स्वस्थ जीवन के लिए आयुर्वेद रामबाण है। आयुर्वेदिक दवाओं का फायदा भले ही देर से मिलता है मगर इससे इलाज स्थायी होता है। इन सब खूबियों के बावजूद सरकारी आयुर्वेदिक अस्पतालों में इलाज की स्थिति ठीक नहीं है। आयुर्वेदिक चिकित्सा को बढ़ावा देने के लिए जिले में 50 राजकीय आयुर्वेदिक अस्पताल खोले गए हैं। इनमें डाॅक्टरों के 50 पद सृजित हैं। जिसमें से 10 पद रिक्त चल रहे हैं। इन अस्पतालों में हर रोज दूर-दराज से मरीज इलाज कराने पहुंचते हैं। लेकिन उन्हें मायूस होकर अन्य अस्पतालों की दौड़ लगानी पड़ रही है। दवा देने के लिए फार्मासिस्ट तो तैनात हैं लेकिन बिना डॉक्टर के मरीजों का इलाज सही से नहीं हो पा रहा है।
इन अस्पतालों में नहीं हैं डॉक्टर
गैरखेत, जागेश्वर, क्वैरला, सैंणामानुर, टाना, नाली, बसईअगासपुर, बसंतपुर, नागचूला खाल, बकस्वाड़ आयुर्वेदिक अस्पताल में डॉक्टरों के पद रिक्त है।
जिला मुख्यालय का आयुर्वेदिक अस्पताल ही भवन विहीन
अल्मोड़ा। राजकीय आयुर्वेदिक अस्पताल नगर (अल्मोड़ा) लोअर माल रोड खोल्टा में किराये के भवन में संचालित हो रहा है। जिला मुख्यालय में इस अस्पताल को संचालित करने के लिए सरकारी भवन अब तक नहीं मिल सका है।
आयुर्वेदिक अस्पतालों में चिकित्सकों की कमी है। इसकी सूचना उच्चाधिकारियों को दी गई है। रिक्त पदों पर नियुक्ति शासन स्तर से ही संभव है।
- डॉ. निवेदिता जोशी, जिला आयुर्वेदिक और यूनानी अधिकारी, अल्मोड़ा।