अल्मोड़ा। सस्ते इलाज की उम्मीद में सरकारी अस्पताल पहुंच रहे मरीजों को निजी मेडिकल स्टोरों में दौड़ाया जा रहा है। स्वास्थ्य सचिव के निर्देशों को डॉक्टर मानने के लिए तैयार नहीं हैं जिसमें सरकारी अस्पतालों के डॉक्टरों को साफ तौर पर बाहर से दवा न लिखने के निर्देश जारी हुए हैं।
नि:शुल्क दवा की उम्मीद में इन सरकारी अस्पतालों में पहुंचे महज 10 फीसदी मरीजों को ही दवा उपलब्ध हो रही है। अन्य लोगों को बाजार से खरीदने को मेडिकल स्टोर भेज दिया जा रहा है। यहां तक कि दर्द निवारक दवा की गोलियां व इंजेक्शन भी बाहर से मंगवाए जा रहे हैं।
मंगलवार को संवाद न्यूज एजेंसी ने जिला व जिला महिला अस्पताल की पड़ताल की। इस दौरान मरीजों के पर्चों में अधिकतर दवा बाहर से लिखी गईं थीं। अस्पताल के दवा केंद्र में सन्नाटा पसरा रहा तो मेडिकल स्टोरों में भीड़ उमड़ी रही। जिला अस्पताल पहुंचे दन्या के सुंदर सिंह ने कहा वह पर्चा लेकर दवा केंद्र पहुंचे लेकिन उसमें लिखीं सभी दवा वहां नहीं मिली और उन्हें मेडिकल स्टोर की दौड़ लगानी पड़ी।
जन औषधि केंद्र पर भी दवाओं का टोटा
अल्मोड़ा। लोगों को सस्ती जेनरिक दवा उपलब्ध हों, इसके लिए जन औषधि केंद्र खोले गए हैं। इन केंद्रों में 250 से अधिक प्रकार की दवा उपलब्ध होनी चाहिए लेकिन नगर के कई जन औषधि केंद्र में पर्याप्त दवाओं का टोटा है। जानकारी के मुताबिक इन केंद्रों में 20 से 30 तरह की दवा लंबे समय से उपलब्ध नहीं हैं। ऐसे में मरीजों को निजी मेडिकल स्टोरों की दौड़ लगाने को मजबूर होना पड़ रहा है।
लोगों का दर्द
जिला अस्पताल में डॉक्टर ने कुछ दवा बाहर से लिखी। जन औषधी केंद्र में भी यह दवा नहीं मिली। मजबूरन मेडिकल स्टोर से दवा खरीदनी पड़ी।
-पवन जोशी, दुगालखोला।
पर्चे में लिखी सभी दवाएं अस्पताल से ही मिलनी चाहिए। बाजार से दवा लिखने से मरीजों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ता है। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों को इस पर रोक लगानी चाहिए।
सुंदर सिंह, धारानौला।
सीएमओ का पक्ष
सभी डॉक्टरों को बाहर से दवा न लिखने के निर्देश दिए गए हैं। यदि बाहर से दवा मंगवाई गई तो कार्रवाई होगी। इस पर गंभीरता से जांच होगी।
डॉ. आरसी पंत, सीएमओ, अल्मोड़ा।