अल्मोड़ा जिले में डिजिटल अरेस्ट के मामले लगातार बढ़ते जा रहे हैं। साइबर अपराधी ने दिल्ली पुलिस इंस्पेक्टर बनकर भतरौंजखान क्षेत्र के एक व्यक्ति को फोन किया। उन्हें बताया कि दुष्कर्म के मामले में तुम्हारे लड़के को पकड़ा है और रुपये भेजो। बदनामी के डर से उस व्यक्ति ने जेवर और अन्य सामान बेचकर 65 हजार रुपये भेज दिए। ठगी का पता चलने पर पीड़ित ने भतरौंजखान थाने में तहरीर देकर साइबर ठग के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।
भतरौंजखान लौकोट निवासी बालकृष्ण का कहना है कि उनका लड़का विनोद दिल्ली में काम करता है। 23 जुलाई को 9:30 बजे उनके मोबाइल पर व्हाट्सएप पर वाइस कॉल आई। कॉल करने वाले ने खुद को दिल्ली पुलिस का इंस्पेक्टर बताया और कहा कि दुष्कर्म के मामले में हम दो लड़कों को तीन दिन से ढूंढ रहे थे।
आज सुबह उन दोनों के साथ तुम्हारे बेटे को भी हम थाने लाए हैं। तुम्हारे लड़के की कोई गलती नहीं है पर दोनों के लड़कों के साथ बैठा था इसलिए कार्रवाई बराबर होगी। फिर उसने एक लड़के की मुझसे बात कराई। रोते हुए उसने कहा कि बाबू मेरे सारे डॉक्यूमेंट और फोन इन्होंने जमा कर लिए हैं।
इसके बाद उन्होंने कहा कि जितने रुपये कहते हैं डाल दो। वह डर गए कि कहीं वह उनके लड़के को दुष्कर्म के मामले में फंसा न दें। फोन करने वाले व्यक्ति के खाते में पत्नी के जेवर बेचकर 20,000 रुपये डाल दिए। 30,000 रुपये किसी व्यक्ति से उधार लेकर भी डाल दिए। इसके बाद भी साइबर ठग उन्हें डराते रहे और 20 हजार रुपये भेजने की मांग करने लगे।
इस पर उन्होंने 15 हजार रुपये और भेज दिए। इसके कुछ देर बाद उनके बेटे का फोन आया। इस पर उन्होंने उससे घटना की जानकारी ली तो उसने बताया कि मुझे किसी ने नहीं पकड़ा है आपसे किसी ने धोखाधड़ी कर रुपये ठग लिए हैं। इसके बाद उन्होंने थाने में तहरीर दी जिस पर पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर मामले की जांच शुरू कर दी है।
डिजिटल अरेस्ट के मामले में पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। लोगों से अपील है कि ऐसे किसी के झांसे में न आए। साइबर ठग अलग-अलग तरीके अपनाकर लोगों को ठग रहे हैं। - देवेंद्र पींचा, एसएसपी अल्मोड़ा।