देश की सीमा पर तैनात सैन्यकर्मियों की सुरक्षा के साथ-साथ उनकी पहचान भी अब साइबर ठगों के निशाने पर है। सीमांत जिले में ऐसा ही मामला सामने आया है। साइबर ठगों ने आईटीबीपी जवान के दस्तावेज के जरिये उसके नाम की 63.50 करोड़ रुपये की फर्जी कंपनी खड़ी कर दी। जब जीएसटी विभाग की टीम उसके घर पहुंची तो यह जानकर सैन्यकर्मी और उसके परिजनों के होश उड़ गए कि उनके नाम पर कोई फर्जी कंपनी भी खुली है। जब पुलिस ने इस मामले में प्राथमिकी दर्ज नहीं की तो पीड़ित सैन्यकर्मी की पत्नी को न्यायालय की शरण लेनी पड़ी। अब मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (सीजेएम) के आदेश के बाद कोतवाली में प्राथमिकी दर्ज हो सकी।
रई निवासी पिंकी पांडेय के अनुसार उनके पति सीटी पांडेय आईटीबीपी की 9वीं बटालियन में अरुणाचल प्रदेश के लोहित जिले में तैनात हैं। अप्रैल 2024 में उन्हें पैसों की जरूरत थी। उन्होंने मोबाइल पर पर्सनल लोन के लिए सर्च किया तो अनजान वेबसाइट का लिंक मिला। लिंक पर क्लिक करते ही एक वेब पेज खुला। लोन की औपचारिकता समझकर जवान ने अपना आधार कार्ड, पैन कार्ड, बिजली का बिल और फोटो अपलोड कर दिए। कुछ देर बाद अनजान नंबर से कॉल आई। वेरिफिकेशन के नाम पर उनसे सारी जानकारी ले ली गई और मोबाइल पर आया ओटीपी भी पूछ लिया गया। सैन्यकर्मी ने इसे लोन की सामान्य प्रक्रिया समझकर ओटीपी शेयर कर दिया। इसके बाद से सैन्यकर्मी के नाम पर फर्जी कंपनी खड़ा करने का खेल शुरू हुआ।
जीएसटी टीम पहुंची तो उड़े होश
फरवरी 2025 में उत्तराखंड जीएसटी इंस्पेक्शन की एक टीम पिथौरागढ़ में रई स्थित उनके आवास पर पहुंची। टीम ने बताया कि मुरलीधर इंटरप्राइजेज नाम की एक कंपनी उनके पति के नाम पर पंजीकृत है जो करोड़ों का लेन-देन कर रही है और वित्तीय धोखाधड़ी में जांच के घेरे में है। यह सुनकर पत्नी के होश उड़ गए। उन्होंने तुरंत पति को सूचना दी। इसके बाद जवान ने अरुणाचल के लोहित जिले के थाने में इसकी शिकायत दर्ज कराई।
63 करोड़ का टैक्स नोटिस
जून 2025 में जवान को एक और झटका लगा। जीएसटी विभाग से 63.74 कऱोड़ रुपये से अधिक का टैक्स डिमांड ऑर्डर आया। हालांकि, नोटिस में यह भी उल्लेख था कि उक्त जीएसटी रजिस्ट्रेशन को अप्रैल 2024 में ही रद्द कर दिया गया है लेकिन तब तक ठग करोड़ों का खेल कर चुके थे।
थाने से लेकर एसपी तक पहुंचा मामला, कहीं नहीं हुई सुनवाई
पीड़िता पिंकी पांडेय ने नौ जून 2026 को थाना कोतवाली पिथौरागढ़ में लिखित तहरीर दी। मामले की जांच फाइनेंशियल फ्रॉड यूनिट के प्रभारी नीरज भाकुनी को सौंपी गई। सूत्रों के अनुसार जांच में धोखाधड़ी की पुष्टि भी हो गई लेकिन इसके बावजूद प्राथमिकी दर्ज नहीं की गई। इसके बाद पीड़िता ने पुलिस अधीक्षक से मिलकर प्राथमिकी दर्ज करने की गुहार लगाई लेकिन वहां से भी उन्हें निराशा हाथ लगी। अंत में थक-हारकर पीड़िता ने सीजेएम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। कोर्ट ने मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस को तत्काल प्राथमिकी दर्ज करने के निर्देश दिए। कोर्ट के आदेश के बाद पुलिस ने अज्ञात साइबर ठगों के खिलाफ धोखाधड़ी, पहचान की चोरी की धाराओं में प्राथमिकी दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। पुलिस अब यह पता लगा रही है कि सैन्यकर्मी के दस्तावेज से कंपनी कहां रजिस्टर्ड की गई और इसका नेटवर्क कहां तक फैला है।
आईटीबीपी के जवान के साथ हुई धोखाधड़ी की प्राथमिकी दर्ज कर मामले की जांच शुरू कर दी है। इसके बाद ही कुछ कहा जा सकेगा। -गोविंद बल्लभ जोशी, सीओ, पिथौरागढ़