द्वाराहाट (अल्मोड़ा)। द्वाराहाट स्नातकोत्तर महाविद्यालय में समाजशास्त्र विभाग और भारतीय सामाजिक विज्ञान अनुसंधान परिषद की ओर से आयोजित सेमिनार के दूसरे दिन विशेषज्ञों ने स्वदेशी ज्ञान परंपरा और भारतीय संस्कृति के महत्ता पर विचार रखे। मुख्य अतिथि प्रो. डीएस बिष्ट ने विकसित भारत अभियान के तहत स्वदेशी ज्ञान प्रणाली को अपनाने पर जोर दिया। आगरा महाविद्यालय असिस्टेंट प्रो. मोनिका वर्मा ने अपना शोध पत्र प्रस्तुत करते हुए कहा कि राजवंशी समुदायों में ऐसी परंपराएं हैं जो पेड़ों पौधों को संरक्षित करते हैं। प्रो. शालिनी शुक्ला ने वैदिक साहित्य और आयुर्वेद के योगदान पर प्रकाश डाला। प्रो. नंदिनी वशिष्ठ ने सभी शोधपत्रों को भारतीय ज्ञान परंपरा का सार बताया। वहां प्राचार्य डॉ. डीसी पंत, डॉ पुष्कर मिश्रा, प्रो. प्रतिमा चौधरी, प्रो. मनीष मिश्रा, डॉ1 उपासना शर्मा, डॉ. विकास कुमार आदि मौजूद रहे।