सड़क के अभाव में सिलिंडर कंधे पर रखकर ले जाता ग्रामीण। संवाद
अल्मोड़ा। भैंसियाछाना के तीन से अधिक गांवों के ग्रामीण सड़क न होने की मार सहने के लिए मजबूर हैं। हालात यह हैं कि गांव तक पहुंचते-पहुंचते 941 रुपये में मिलने वाले घरेलू गैस सिलिंडर की कीमत 1500 रुपये तक पहुंच रही है। ऐसे में लोग सिलिंडर भराने से परहेज करने लगे हैं और चूल्हा फूंकने के लिए मजबूर हैं।
छह साल पूर्व हटौला, लोडिया, ठुडियाली गांवों को जोड़ने के लिए लोडिया गधेरे से खुडियारी तक 10 किमी सड़क स्वीकृत हुई थी जो अब तक धरातल पर नहीं उतर सकी है। इन गांवों की तीन हजार से अधिक की आबादी वर्षों से सड़क की मांग कर रही है जो अब तक सुनी नहीं गई।
सड़क न होने से लोगों को गैस सिलिंडर भराने लिंगुणता आना पड़ता है। ग्रामीणों को सिलिंडर लाने और इसे घर तक पहुंचाने में 600 रुपये मजदूरी देनी पड़ रही है। ऐसे में सिलिंडर घर तक 1500 रुपये में पहुंच रहा है। इसके चलते कई ग्रामीणों ने सिलिंडर भराना बंद कर दिया और वह चूल्हा फूंकते हुए धुंआ रहित रसोई के दावों को खोखला साबित कर रहे हैं।
लोनिवि के एई हरीश जोशी का कहना है कि सड़क निर्माण के लिए वन विभाग की स्वीकृति नहीं मिली है, इससे दिक्कत हो रही है। स्वीकृति मिलते ही सड़क निर्माण शुरू किया जाएगा।
मरीजों को डोली से अस्पताल पहुंचाना मजबूरी
अल्मोड़ा। सड़क न होने से ग्रामीण दिक्कतें झेल रहे हैं। सबसे अधिक परेशानी बीमारों को समय पर अस्पताल पहुंचाने में आ रही है। मरीज को डोली के सहारे अस्पताल पहुंचाना ग्रामीणों की मजबूरी बन गई है। सड़क न होने से युवा पलायन कर गए हैं और कई बार डोली उठाने वाला भी कोई नहीं मिलता। ऐसे में मरीजों को पीठ पर सड़क तक पहुंचाया जाता है, तब उन्हें वाहन नसीब होता है।