अल्मोड़ा। देश, प्रदेश में नशा मुक्ति के लिए कई जागरूकता अभियान चलाए जा रहे हैं। नशीले पदार्थों की रोकथाम के लिए मैदान से लेकर पहाड़ों तक कई जगह पुलिस तैनात है। इसके बावजूद सांस्कृतिक नगरी अल्मोड़ा में नशे का कारोबार खूब फल-फूल रहा है। हालात यह हैं कि मैदानी क्षेत्रों से कई पुलिस चौकियों, बैरियरों को पार कर यहां स्मैक, अन्य नशे का सामान धड़ल्ले से पहुंच रहा है जो पुलिस की कार्यशैली पर सवाल उठा रहा है।
सांस्कृतिक नगरी अल्मोड़ा में एक दशक से स्मैक का प्रचलन खासा बढ़ा है। मैदानी क्षेत्रों से सैकड़ों किमी दूरी पर बसे अल्मोड़ा में स्मैक का कारोबार आसानी से संचालित हो रहा है। इसे पुलिस की सुस्ती कहें या तस्करों के बुलंद हौसले जो किसी भय के आठ से अधिक पुलिस बैरियर, चौकियों, थानों को पार कर स्मैक की तस्करी कर यहां के युवाओं का भविष्य बिगाड़ रहे हैं। पुलिस से मिले आंकड़े इसकी तस्दीक करते हैं।
पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार छह माह में अल्मोड़ा में तस्करों से 66 ग्राम से अधिक स्मैक बरामद हुई है। अधिकतर मामलों में हल्द्वानी, रुद्रपुर, बरेली, पीलीभीत आदि मैदानी क्षेत्रों से तस्करों ने यहां स्मैक पहुंचाई है। यह वे मामले हैं जो पकड़ में आए हैं। पुलिस के मुताबिक छह माह में पिचहत्तर लाख से अधिक कीमत का नशे का सामान पकड़ा गया है।
छह माह में तीन क्विंटल गांजा, तीन किलो चरस जब्त
अल्मोड़ा। जिले में पुलिस ने छह माह में तीन क्विंटल गांजा और तीन किलो चरस बरामद की है। पुलिस ने 165 पेटी अवैध शराब भी पकड़ी है। मादक पदार्थों की तस्करी करने वाले 55 लोगों को पुलिस गिरफ्तार कर चुकी है। इसके बावजूद कई जगह खुलेआम नशे का सामान बेचा जा रहा है। उन तक पुलिस और आबकारी विभाग नहीं पहुंच सका है।
स्मैक सहित अन्य नशे का सामान निश्चित तौर पर बाहर से यहां पहुंच रहा है। तस्करी रोकने के लिए पुलिस तत्परता से काम कर रही है। नशे के खिलाफ चेकिंग अभियान चलाया जा रहा है। नशे की गिरफ्त में फंसे युवाओं की काउंसलिंग भी की जा रही है। स्मैक का सेवन करने वाले युवाओं का चिह्नीकरण भी किया जा रहा है। यही कारण है कि अल्मोड़ा में पुलिस ने छह माह में पिचहत्तर लाख से अधिक का नशे का सामान पकड़ा है। - विमल कुमार, सीओ, अल्मोड़ा।