रानीखेत (अल्मोड़ा)। गर्मी बढ़ने के साथ ही ग्रामीण क्षेत्रों में पानी की समस्या भी गंभीर होने लगी है। चिलियानौला से लेकर ताड़ीखेत के गांव में ग्रामीणों को पर्याप्त पानी नहीं मिल पा रहा है। लोग पारंपरिक स्रोतों पर निर्भर हैं।
सर्वाधिक संकट वाले सिमोली, पथुली, गैरड़, थकुलाड़ी, कुरिया मटेला क्षेत्र के लिए कुजगड़ नदी से नई योजना बनाने की मांग उठने लगी है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि नई योजना अस्तित्व में आ गई तो गगास और तिपौला योजनाओं के पानी की फिर जरूरत नहीं पड़ेगी।
बता दें कि रानीखेत, चिलियानौला, ताड़ीखेत सहित आसपास के गांवों के लिए गगास पेयजल योजना और चिलियानौला ग्राम समूह पेयजल योजना से आपूर्ति की जाती है। ताड़ीखेत के सिमोली, पथुली सहित कई गांव के लोग आए दिन पानी की समस्या से परेशान रहते हैं। सामाजिक कार्यकर्ता दीपक ठाकुर ने कहा कि पानी की समस्या 50 साल बाद भी हल नहीं हो सकी है।
उन्होंने कहा कि कुजगड़ नदी से नई योजना बनाई जा सकती है। इससे काफी हद तक दर्जनों गांवों की पेयजल समस्या का निराकरण हो जाएगा। कहा कि नदी में पानी ठीक है। उन्होंने इस संंबंध में भारत सरकार से भी आग्रह किया है। कहा कि यदि दो पंप भी कुजगड़ नदी में लग जाएं तो आधा दर्जन से अधिक गांवों में आपूर्ति हो जाएगी।
चिलियानौला में पेयजल आपूर्ति के लिए संयुक्त मजिस्ट्रेट से मिले लोग
रानीखेत। चिलियानौला नगरपालिका क्षेत्र के कई वार्डों में पानी की आपूर्ति नहीं हो पा रही है। परेशान लोगों ने इस बाबत संयुक्त मजिस्ट्रेट जय किशन से मुलाकात की। कहा कि दो-दो पेयजल योजनाएं होने के बावजूद पानी की किल्लत है। उन्होंने वितरण व्यवस्था सुधारने, योजनाओं को दुरुस्त करने के निर्देश देने की मांग की। संयुक्त मजिस्ट्रेट ने इस संबंध में जल संस्थान और जल निगम के अधिकारियों से शीघ्र वार्ता करने का आश्वासन दिया। इस दौरान कैंट बोर्ड सभासद मोहन नेगी, पूर्व उपाध्यक्ष संजय पंत, शंकर दत्त बुधोड़ी आदि मौजूद थे। संवाद
कुजगड़ नदी से नई योजना नहीं बन रही है। गगास और तिपौला योजनाओं को ही जल जीवन मिशन के तहत दुरुस्त करने के प्रयास चल रहे हैं। इसमें कुछ समय बाद ग्रामीण क्षेत्रों में पानी की आपूर्ति पर्याप्त हो जाएगी। बारिश के कारण पंपिंग नहीं हो पा रही है जिस कारण किल्लत बनी थी। -सुरेश ठाकुर, अधिशासी अभियंता, जल संस्थान रानीखेत।