चार दिन पूर्व चिलियानौला से लापता 15 वर्षीय किशोर का शव निकटवर्ती पीजी कालेज के निर्माणाधीन छात्रावास में रस्सी के फंदे पर लटकता मिला। सोमवार की सुबह वहां बंदर झगड़ रहे थे। बंदरों को भगाने पहुंचे लोगों ने किशोर का शव लटका देखा। राजस्व पुलिस ने शव का पंचनामा भरकर राजकीय अस्पताल में पोस्टमार्टम कराया। खुदकुशी का कारण किसी के समझ नहीं आ रहा है। फिलहाल परिजनों ने कोई तहरीर नहीं सौंपी है।
चिलियानौला निवासी मोहनराम का पुत्र मयंक कुमार केंद्रीय विद्यालय में 10वीं कक्षा का छात्र था। 12 जून की सुबह मयंक घर से स्कूल के लिए निकला, लेकिन वापस नहीं लौटा। तमाम स्थलों पर ढूंढखोज के बाद 14 जून को परिजनों ने तहसील में गुमशुदगी दर्ज कराई थी। सोमवार की सुबह डिग्री कालेज परिसर में बंदर झगड़ रहे थे। बंदरों को भगाने के लिए जब लोग वहां पहुंचे तो उन्होंने निर्माणाधीन भवन के अंदर मयंक का शव झूलते देखा। सूचना मिलते ही चिलियानौला क्षेत्र के लोगों का हुजूम उमड़ पड़ा। मौके पर मयंक के पिता मोहन राम भी पहुंचे। पुत्र का शव देखकर वे गुमसुम हो गए। कोतवाली और राजस्व पुलिस को सूचना दी गई। नायब तहसीलदार मोहन सिंह नेगी ने बताया कि शव नॉयलॉन की रस्सी के सहारे लटका था। उन्होंने शव का पंचनामा भरकर यहां राजकीय अस्पताल में पोस्टमार्टम कराया। पोस्टमार्टम करने वाले डा. आरके सागर ने बताया मयंक के गले में फंदे का गहरा जख्म है, शरीर पर कहीं चोट के निशान नहीं हैं। दम घुटने से ही मयंक की मौत हुई है। राजस्व पुलिस भी मामले का खुदकुशी ही मान रही है। परिजनों की ओर से कोई तहरीर नहीं दे गई।
मोहन राम का दत्तक पुत्र था मयंक
चिलियानौला निवासी मोहन राम और भगवती देवी की कोई संतान नहीं थी। दोनों ने अपने रिश्तेदार से मयंक को गोद लिया था। बताया गया कि मयंक पढ़ने में काफी तेज था। मयंक ने घर से भागने और फिर खुदकुशी का फैसला क्यों लिया, इसका जवाब किसी के पास नहीं।
स्विच ऑफ था मोबाइल
मयंक का स्कूल बैग, जेब में 115 रुपये और पास ही टिफिन बॉक्स पड़ा था, टिफिन में से मयंक ने रोटी भी नहीं खाई थी। राजस्व पुलिस ने मौके से मयंक का मोबाइल भी बरामद किया, जो स्विच ऑफ था। पुलिस अब मोबाइल की पड़ताल करेगी।