मासी से कुछ दूरी पर पटियाचौरा के नौगांव तोक के अंतर्गत रामगंगा नदी के किनारे लगाया गया स्टोन क्रशर नियमों की धज्जियां उड़ा रहा है। नियमानुसार कोई भी स्टोन क्रशन किसी भी नदी से 100 मीटर की परिधि से बाहर लगाया जाना चाहिए, लेकिन यह क्रशर रामगंगा नदी से सिर्फ करीब 10 मीटर की दूरी पर स्थापित कर दिया गया है।
प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से अनुमति लिए बिना चल रहे इस स्टोन क्रशर से हर रोज लाखों का माल सप्लाई हो रहा है, लेकिन न तो रवन्ना काटा जा रहा है और न ही रॉयल्टी ली जा रही है जिससे सरकार को लाखों के राजस्व का चूना लग रहा है। लोग सवाल उठा रहे हैं कि आखिर यह अंधेरगर्दी किसकी शह पर चल रही है।
चौखुटिया-भिकियासैंण मोटर मार्ग पर मासी से कुछ ही दूरी पर पटियाचौरा के नौगांव तोक के अंतर्गत रामगंगा नदी के निकट करीब एक साल से स्थापित स्टोन क्रशर के संचालन में नियमों को ताक में रखा गया है। इस क्रशर को लगाने में नदी से दूरी के मापदंडों को भी दरकिनार किया गया है। नियमानुसार क्रशर रामगंगा से 100 मीटर की दूरी पर लगाया जाना चाहिए, लेकिन यह मुश्किल से 10 मीटर की दूरी पर रामगंगा के एकदम मुहाने पर लगाया गया है।
जानकारी के अनुसार क्रशर लगाने से पहले प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से दो चरणों में अनुमति ली जानी जरूरी है। बताया गया है कि प्रथम चरण की अनुमति तो ले ली गई थी, परंतु दूसरे चरण में ली जाने वाली संचालित करने की अनुमति नहीं ली गई है। जिससे साफ है कि वर्तमान में यह स्टोन क्रशर मानकों को पूरा करने से पहले अनुमति के बगैर ही चल रहा है।
क्रशर से प्रतिदिन दर्जनों डंपर रेत, बजरी आदि माल बिना रवन्ना के पार कर रहे हैं। रमन्ना नहीं मिलने से सरकारी कार्य में लगे ठेकेदारों ने इस क्रशर से माल का उठान कम कर दिया है अलबत्ता निजी निर्माण कार्यों में माल का भारी मात्रा में उठान हो रहा है।
जानकारी के अनुसार क्रशर मालिक को अस्थायी तौर पर प्रतिदिन दो टन माल की बिक्री का लाइसेंस दिया गया था, परंतु उठान कई टन का हो रहा है। पट्टे वाले स्थान के अलावा भी अन्य जगह खनन किया जा रहा है। इस संबंध में खनन अधिकारी राजपाल लेखा का पक्ष लेने का प्रयास किया गया, लेकिन उनसे मोबाइल पर संपर्क नहीं हो सका। बार-बार रिंग जाने के बावजूद उन्होंने फोन नहीं उठाया।