अल्मोड़ा। विशेष सत्र न्यायाधीश कौशल किशोर शुक्ला की अदालत ने चरस तस्करी के एक दोषी को तीन साल और दूसरे दोषी को ढाई साल की सजा सुनाई है। दोनों पर पंद्रह-पंद्रह हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है।
जिला शासकीय अधिवक्ता पूरन सिंह कैड़ा ने बताया कि पुलिस ने 26 फरवरी 2020 को लमगड़ा और शहरफाटक के बीच पैदल मार्ग पर दो युवकों को पकड़ा। तलाशी लेने पर पहाड़पानी जिला नैनीताल के ग्राम मज्यूली निवासी नारायण लाल के पास से 800 ग्राम और वहीं के खजान चंद्र के पास से 606 ग्राम चरस बरामद हुई। तब पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार कर न्यायालय के आदेश पर जेल भेज दिया। उनके खिलाफ न्यायालय में आरोपपत्र प्रस्तुत किया गया। न्यायालय में दोनों पक्षों को सुना गया। विशेष सत्र न्यायाधीश ने सभी पक्षों और गवाहों को सुनने के बाद दोनों को दोषी करार दिया। दोषी खजान चंद्र को तीन साल और नारायण लाल को ढाई साल के कारावास की सजा सुनाई है। दोनों पर पंद्रह-पंद्रह हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है।
सोशल मीडिया पर समुदाय विशेष पर टिप्पणी करने के आरोपी दोषमुक्त
बागेश्वर। न्यायिक मजिस्ट्रेट/सिविल जज पुनीत कुमार की अदालत ने सोशल मीडिया पर समुदाय विशेष के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणी करने के आरोपी को दोषमुक्त किया है।
भनार निवासी भवान सिंह कोरंगा ने 10 अप्रैल 2020 को अपने व्हाट्सएप ग्रुप पर समुदाय विशेष पर टिप्पणी करते हुए पोस्ट शेयर की थी। अपनी पोस्ट में आरोपी ने लोगों से बाहरी प्रदेशों से पहाड़ों की ओर आने वाले समुदाय विशेष के लोगों को मकान और दुकान किराए पर नहीं देने की अपील की थी। उन दिनों कोरोना संक्रमण के चलते लॉकडाउन लगा था। प्रदेश में धारा 144 लागू की गई थी। पुलिस प्रशासन की ओर से सोशल मीडिया पर आपत्तिजनक पोस्ट शेयर नहीं करने के लिए टीवी चैनल, लाउडस्पीकर आदि माध्यमों से मुनादी करवाई जा रही थी। इसके बावजूद आरोपी ने दो बार आपत्तिजनक टिप्पणी वाली पोस्ट को शेयर कर नियम का उल्लंघन किया।
उस पोस्ट का संज्ञान लेते हुए वादी एसआई लोकेश रावत ने कपकोट थाने में जुबानी तहरीर दी। पुलिस ने आरोपी के खिलाफ धारा 153ए, 153बी, 295ए, 505 (1)(सी) और 67(सी) आईटी अधिनियम के तहत केस दर्ज किया। आरोपी के खिलाफ धारा 188 के तहत परिवाद पत्र दाखिल किया गया। अभियोजन पक्ष की ओर से मामले में आठ गवाह पेश कराए गए। आरोपी की ओर से अधिवक्ता नरेंद्र सिंह कोरंगा और हेम सिंह राणा ने मामले की पैरवी की। न्यायालय ने साक्ष्य के अभाव में आरोपी को दोषमुक्त करने का फैसला सुनाया।