मकर संक्रांति के मौके पर पैलाग-पैलाग (सिर झुकाकर पैरों में प्रणाम) की गूंज के साथ निकली बच्चों की टोलियां लोगों के आकर्षण का केंद्र रहीं। गांव, कस्बों और बाजारों में छोटे बच्चे सुबह से ही पैलाग-पैलाग के अभिवादन के साथ गुड़ और टॉफी आदि के लिए निकल पड़े। बच्चों की आवाज सुनते ही लोग उनके थैले में गुड़, चॉकलेट और टॉफी आदि डालते रहे। बच्चे भी खुश होकर आगे बढ़ते रहे। कुछ सालों पूर्व तक बच्चे बांस की बनी टोकरी लेकर निकलते थे जबकि अब हाथ में पन्नी लिए देखते हैं।