अल्मोड़ा। राजकीय मेडिकल कॉलेज में आयुष्मान योजना के तहत निशुल्क उपचार के लिए निर्धन मरीजों को पसीना बहाना पड़ रहा है। राशन कार्ड पर बीपीएल क्रमांक अंकित न होने से संबंधित मरीज बिना इलाज के घर लौटने और सरकारी कार्यालयों के चक्कर काटने के लिए मजबूर हैं।
बीपीएल राशन कार्ड धारक मरीजों को मेडिकल कॉलेज में निशुल्क उपचार के लिए क्रमांक बताना जरूरी है। यही नियम उन पर भारी पड़ रहा है क्योंकि विकासखंड स्तर पर राशन कार्ड पर बीपीएल क्रमांक दर्ज करने की कोई व्यवस्था नहीं है।
ऐसे में मेडिकल कॉलेज प्रबंधन के नियम का पालन करने के लिए उन्हें बीडीओ कार्यालय से बीपीएल प्रमाणपत्र बनाने के लिए पसीना बहाना पड़ रहा है। ऐसा न होने के कारण कार्ड के भरोसे अस्पताल पहुंचे मरीज मायूस होकर लौट रहे हैं। इसमें उनका काफी समय और किराया फिजूल खर्च हो रहा है।
तीन दिन पूर्व बदले नियम
अल्मोड़ा। राजकीय मेडिकल कॉलेज में पहले राशन कार्ड के आधार पर ही पंजीकरण की सुविधा थी लेकिन तीन दिन पहले प्रबंधन ने नियम में बदलाव कर दिया। इसकी जानकारी कई जिम्मेदार और जरूरतमंद लोगों को नहीं है। इसका खामियाजा गरीब मरीजों को भुगतना पड़ रहा है।
बोल मरीज
पहले राशन कार्ड दिखाने से पंजीकरण की पर्ची मिल जाती थी लेकिन पर्ची काउंटर पर बताया कि उनके राशन कार्ड में बीपीएल संख्या दर्ज नहीं है। ऐसे में उन्हें मायूस होकर लौटना पड़ा। दूसरे दिन बीपीएल प्रमाणपत्र लाकर निशुल्क इलाज मिल सका। - राम सिंह, नैनीताल।
मेडिकल कॉलेज में दूरस्थ ग्रामीणों क्षेत्रों से भी कई मरीज आ रहे हैं। मैं भी मरीज के साथ आया हूं लेकिन उनका बीपीएल प्रमाणपत्र बनाने के लिए वापस खंड विकास कार्यालय जाना पड़ा। प्रमाणपत्र दिखाने के बाद ही मरीज का उपचार हो सका। - महेश लाल, शीतलाखेत।
निशुल्क उपचार की योजना का लाभ सही व्यक्ति को मिले, इसके लिए बीपीएल क्रमांक मांगा जा रहा है। राशन कार्ड पर यह क्रमांक दर्ज न होने पर संबंधित को बीपीएल प्रमाणपत्र लाना होगा। - प्रो. सीपी भैसोड़ा, प्राचार्य, राजकीय मेडिकल कॉलेज, अल्मोड़ा।