अल्मोड़ा का बेस अस्पताल। संवाद
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अल्मोड़ा (दीपक चंद्र कापड़ी)। विकास की गति नापने का कोेेेेेेई पैमाना तो तय नहीं है लेकिन इसकी हकीकत की एक मिसाल अल्मोड़ा का बेस अस्पताल भी है। दस साल पहले शुरू हुआ इसका निर्माण कार्य अब तक चल ही रहा है। सिस्टम की लापरवाही का आलम यह है कि अस्पताल अग्निशमन विभाग की एनओसी के बगैर चल रहा है।
अल्मोड़ा में वर्ष 2012 में 250 करोड़ रुपये से अधिक की धनराशि से बेस अस्पताल के नवनिर्माण और विस्तारीकरण कार्य शुरू किया था। यूपी निर्माण निगम को इसके निर्माण की जिम्मेदारी दी गई लेकिन तब से आज तक इसका निर्माण कार्य पूरा नहीं हो सका है। बेस अस्पताल का संचालन करने वाले चिकित्सा शिक्षा विभाग के अनुसार इसमें अब भी 10 प्रतिशत से अधिक कार्य होना शेष है। हैरानी की बात यह है कि अब तक बेस अस्पताल का हस्तांतरण कार्यदायी संस्था ने चिकित्सा शिक्षा विभाग को नहीं हुआ है लेकिन बगैर हस्तांतरण के ही इसे संचालित करने में जल्दबाजी दिखा दी गई। अस्पताल में एक समय में 50 से 100 मरीज भर्ती होते हैं। इसके अतिरिक्त हर रोज यहां 300 से अधिक लोग इलाज को पहुंचते हैं। संवाद
कोट- बेस अस्पताल का अब तक हस्तांतरण नहीं हुआ है। अस्पताल प्रबंधन को इसके संचालन के निर्देश मिले थे। ऐसे में विभाग अपने रिस्क पर इसका संचालन कर रहा है। आग की घटनाओं से निपटने के लिए इंतजाम नहीं है, जिस पर काम किया जा रहा है। कई भवनों का निर्माण अब भी होना शेष है। -डॉ. अजय आर्य, एमएस, बेेेेस अस्पताल, अल्मोड़ा।