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आशा वर्कर्स को न्यूनतम वेतन देने को तैयार नहीं सरकार: पांडे

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मांगों के समर्थन में नारेबाजी करते आशा वर्कर्स। - फोटो : ALMORA
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भतरौंजखान (अल्मोड़ा)। एक्टू से संबद्ध उत्तराखंड आशा हेल्थ वर्कर्स यूनियन की भौनखाल में हुई ब्लॉक स्तरीय बैठक को संबोधित करते हुए उत्तराखंड आशा हेल्थ वर्कर्स यूनियन के प्रदेश महामंत्री डॉ. कैलाश पांडे ने कहा कि आशा वर्कर्स शोषण की शिकार हैं। सरकार खुलेआम आशा और अन्य महिला कामगारों के श्रम का शोषण कर न्यूनतम वेतन तक देने को तैयार नहीं है। आशाओं को सरकारी कर्मचारियों का दर्जा देने की बात को आगे बढ़ाने के बजाय सरकार राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन का निजीकरण करने पर आमादा है जो आशाओं को बंधुआ मजदूर बनाने की ओर धकेल देगा। उन्होंने कहा कि आशाओं की नियुक्ति मातृ-शिशु मृत्यु दर में कमी लाने के लिए की गई थी। आशाओं की नियुक्ति के बाद मातृ-शिशु मृत्यु दर में कमी आयी है। आशा वर्कर्स ने अपनी मांगों के समर्थन में नारेबाजी भी की। इस अवसर पर ब्लॉक अध्यक्ष उमा रावत, पुष्पा भट्ट, तारा देवी, राधा देवी, नंदी सुंदरियाल, नीमा रावत, गीता बिष्ट, अनीता देवी, आशा देवी, तुलसी, नंदी, गंगा, पन्ना, सुनीता, निर्मला अधिकारी आदि आशा वर्कर थी।
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