हवालबाग के कुटगोली में मौनपालन करते भुवन तिवारी। संवाद
अल्मोड़ा। हवालबाग के पास कुटगोली गांव के भुवन तिवारी ने मौनपालन को आजीविका का साधन बनाया है। उन्होंने अन्य युवाओं को भी स्वरोजगार की राह दिखाई है। वे सीमित संसाधनों से मौनपालन कर सालाना डेढ़ लाख रुपये से अधिक कमा रहे हैं। उनके पास स्थानीय शहद की खासी मांग है।
इंटर करने के बाद भुवन ने नौकरी की तलाश में महानगरों की खाक छानी लेकिन अंत में उन्होंने गांव लौटकर स्वरोजगार शुरू किया और खुद को आत्मनिर्भर बनाने के लिए पूरी ताकत झोंक दी। उन्होंने ज्योलीकोट नैनीताल में तीन दिन का प्रशिक्षण लिया। वर्ष 2015 में व्यक्तिगत रूप से दो बॉक्स खरीदकर मौनपालन शुरू किया। समय के साथ उन्होंने अन्य बॉक्स भी स्थापित किए। अब उनके पास 20 से अधिक मौन बॉक्स हैं जिनसे वह सालाना चार क्विंटल शहद का उत्पादन कर रहे हैं जिससे उन्हें डेढ़ लाख से अधिक सालाना आय हो रही है।
दिल्ली, लखनऊ तक है शहद की मांग
अल्मोड़ा। भुवन 1,200 रुपये प्रति किलो की दर से शहद बेच रहे हैं। भुवन ने बताया कि उनके पास अल्मोड़ा, हल्द्वानी, लखनऊ, हरिद्वार समेत कई शहरों से शहद की मांग आ रही है। वहां के लोग मांग भेजकर उन्हें ऑनलाइन भुगतान कर रहे हैं। वे सीलबंद शहद को रोडवेज बस समेत अन्य वाहनों के जरिये लोगों तक पहुंचा रहे हैं।