दुग्ध उत्पादन का प्रमुख केंद्र दूनागिरि क्षेत्र में लंबे समय से पशुओं में चल रही बीमारी अभी खत्म नहीं हुई है। इसके चलते कई मवेशियों की मौत हो चुकी है। ग्रामीणों ने लंपी बीमारी की आशंका जताते हुए विभाग से फिर से गांव में शिविर लगाकर टीकाकरण करने की मांग की है। कहा कि मवेशी तड़प तड़प कर मर रहे हैं। शनिवार को ही तीन दुधारू गायों ने दम तोड़ दिया।
दुधोली दुग्ध विकास संगठन अध्यक्ष आनंद सिंह बिष्ट ने बताया कि गत दिवस दुधोली निवासी जानकी देवी, शांति देवी और टोढरा निवासी माया देवी की दुधारू गायों ने दम तोड़ दिया। इसके अलावा कई मवेशी अभी भी बीमार हैं। क्षेत्र के पशुपालकों ने पशुओं में लंपी वायरस की आशंका जताते हुए रोकथाम के लिए विभाग से शीघ्र क्षेत्र में शिविर लगाकर टीकाकरण करने और दवाइयां वितरित करने की मांग की है।
टीकाकरण करने की मांग की
बता दें कि दुधोली, रतखाल, टोडरा, खोलियाबांज आदि क्षेत्र दुग्ध उत्पादन का प्रमुख केंद्र हैं। यहां के ग्रामीणों का पशुपालन मुख्य आजीविका का स्रोत है। हालांकि लंपी वायरस से उत्तराखंड में सैकड़ों पशु मर गए हैं। दुधोली आदि क्षेत्र के दुग्ध उत्पादकों ने भी लंपी वायरस के संक्रमण की आशंका जाते हुए रोकथाम के लिए फिर से टीकाकरण करने की मांग की है।
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यह लंपी वायरस न होकर वायरल है। पशुओं के मरने के अन्य कारण भी हैं। क्षेत्र के चारों गांव में शिविर लगाकर दवाइयां और टीकाकरण किया गया। जिन पशुपालकों ने नियमित दवाइयां खिलाई और मवेशियों का टीकाकरण किया उनके पशु ठीक हुए लेकिन कुछ पशुपालकों ने लापरवाही कर दी। इस कारण बीमारी खत्म नहीं हुई है। कहा कि शीघ्र ही इन गांवों में शिविर लगाया जाएगा।
- डॉ. महेंद्र प्रताप मौर्या, पशु चिकित्सा अधिकारी, द्वाराहाट।